Friendship Day 2025: कभी देर रात की चाय पर दोस्ती गहराई जाती थी, अब वो ‘टाइपिंग…’ देखकर उम्मीदें लगाई जाती हैं

Friendship Day 2025: आजकल दोस्ती का अर्थ तेजी से बदल रहा है। सोशल मीडिया और वीडियो कॉल्स के जरिए लोग जुड़ते हैं, लेकिन इसमें भावनात्मक जुड़ाव कम होता दिखता है। तकनीक ने दोस्ती को नई दिशा दी है, परंतु ‘फिजिकल प्रेजेंस’ की कमी महसूस होती है।

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Friendship Day 2025: “सुना है पिताजी बीमारी है आपके, उनका ध्यान रखना।”
चैट पर मित्र से मिला यह छोटा-सा संदेश आज के डिजिटल दौर की दोस्ती को बयां करता है। एक समय था जब ऐसा हालचाल पूछने वाला दोस्त दरवाजे पर खड़ा मिलता था, लेकिन अब वही चिंता मोबाइल की स्क्रीन पर झलकती है। तकनीक ने रिश्तों को जोड़े रखा है, पर उनमें स्पर्श, भावनाएं और साथ निभाने का तरीका अब वर्चुअल हो गया है।

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आज की दोस्ती स्क्रीन पर उगती है, चैट में पनपती है और रील्स व स्टोरीज में जीती जाती है। साथ होने का एहसास अब डिजिटल नोटिफिकेशन से जुड़ गया है। पहले जहां दोस्ती का मतलब साथ बैठकर घंटों बातें करना, सैर पर जाना या चाय की चुस्कियों के साथ हंसी-मजाक करना होता था। वहीं, अब यह सब कुछ मोबाइल स्क्रीन और इंटरनेट तक सीमित होता जा रहा है। सोशल मीडिया, वीडियो कॉल, गेमिंग ऐप्स और इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स ने लोगों को जोड़ने का तरीका ही बदल दिया है।

ऑनलाइन रिश्तों का बढ़ता चलन

अब दोस्त बनाना और उन्हें निभाना एक ‘ऑनलाइन एक्टिविटी’ बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं, मीम्स शेयर करते हैं, वॉयस नोट भेजते हैं और वीडियो कॉल कर लेते हैं। कई बार तो ऐसे दोस्त बन जाते हैं जिनसे कभी आमने-सामने मुलाकात भी नहीं हुई होती।

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युवाओं के बीच तो यह चलन और भी ज्यादा है। ऑनलाइन गेम्स खेलते समय बनती टीमों में दोस्ती हो जाती है, जो बाद में सोशल मीडिया पर भी जारी रहती है। दोस्ती की इस नई शैली में इमोशनल सपोर्ट भी दिया जाता है, पर यह सब स्क्रीन के जरिए होता है।

क्या दूरी से बदल रहा है जुड़ाव?

डिजिटल दोस्ती भले ही सुविधा देती हो, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव में थोड़ी कमी भी देखी जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल मीडिया पर दोस्ती में दिखावे का पहलू ज्यादा होता है। हर कोई अपनी ‘ऑनलाइन पर्सनैलिटी’ दिखाता है, जो असल जीवन से कुछ अलग हो सकती है।

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हालांकि, कोरोना काल में जब सामाजिक दूरी जरूरी थी, तब तकनीक ही थी जिसने लोगों को जोड़े रखा। वीडियो कॉल पर जन्मदिन मनाना, ऑनलाइन गेम्स में साथ समय बिताना, और ग्रुप चैट में बातें करना, ये सब उस दौर की दोस्ती के नए तरीके बन गए थे।

तकनीक से जुड़ा फायदा या नुकसान?

तकनीक ने निश्चित रूप से दोस्ती को नए आयाम दिए हैं। दूर बैठे लोग भी अब एक क्लिक में जुड़ सकते हैं, बात कर सकते हैं और अपनी भावनाएं साझा कर सकते हैं। लेकिन इसमें ‘फिजिकल प्रेजेंस’ की कमी महसूस होती है।

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टेक्नोलॉजी ने जहां दोस्ती को सीमाओं से मुक्त किया है, वहीं इसे निभाने का तरीका भी बदला है। अब साथ निभाना मोबाइल नोटिफिकेशन, चैट रिप्लाई और वर्चुअल गिफ्ट्स तक सीमित हो गया है। लेकिन असली दोस्ती आज भी वहीं टिकती है जहां दिल से जुड़ाव होता है, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन।
लेख: नवीन पारमुवाल

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