Hindu Nation Rajasthan: राजस्थान की धरती पर हिंदू राष्ट्र का ध्वज सबसे पहले लहराएगा, यह कहना है कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री का। उन्होंने राजस्थान की वीरता का बखान करते हुए कहा कि यहां की भूमि महाराणा प्रताप और रामप्रसाद हाथी जैसे वीरों की है, जिन्होंने विरोधियों को परास्त किया। सीकर के रैवासा धाम में चल रहे ‘सियपिय मिलन महोत्सव’ में धीरेंद्र शास्त्री ने यह विचार व्यक्त किए।
राजस्थान की वीर भूमि का गौरव
राजस्थान की धरती को वीरों की भूमि कहने का कारण यहां के योद्धाओं की अदम्य साहसिकता है। धीरेंद्र शास्त्री ने महाराणा प्रताप की तलवार से लेकर रामप्रसाद हाथी के कट्टर हिंदुत्व की मिसाल दी, जो दुश्मनों के घर का पानी तक नहीं पीता था। उन्होंने कहा कि यहां के लोग ही नहीं, बल्कि घोड़े और हाथी भी कट्टर हिंदू हैं। रैवासा धाम के लोग विशेष भाग्यशाली हैं कि उन्हें इतने संतों के दर्शन का अवसर मिला है। उनका मानना है कि यह भूमि भगवान की भक्ति के लिए उत्तम है और इसे तीर्थ घोषित करना चाहिए।
पाकिस्तान पर कड़ा संदेश
धीरेंद्र शास्त्री ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर छेड़ा गया तो छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कश्मीर को वापस लेने की बात की और कहा कि दहेज में पाकिस्तान भी ले लेंगे। ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह तभी संभव है जब हम राष्ट्रवाद को अपनाएं और अपनी संस्कृति पर भरोसा करें। उन्होंने गो-सेवक बनने और हिंदू राष्ट्र के लिए एक घंटा प्रतिदिन देने का आह्वान किया।
गो-माता के लिए विशेष अभियान
धीरेंद्र शास्त्री ने गो-माता को राष्ट्र माता बनाने की पहल की है। उन्होंने नवंबर में एक पदयात्रा निकालने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना और गोवध पर प्रतिबंध लगाना है। युगांडा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां कन्यादान में गाय दी जाती है और यह परंपरा भारत में भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि गो-माता की रक्षा से ही भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा।
कार्यक्रम में उमड़ी भीड़
कार्यक्रम में भारी भीड़ जमा हुई, जिससे मंच पर अव्यवस्था फैल गई। इस दौरान एक महिला कॉन्स्टेबल भी धक्का लगने से गिर गई। वहीं, योग गुरु बाबा रामदेव ने मुसलमानों की दानशीलता की तारीफ की और कहा कि मुसलमान अपनी मजदूरी का 6% हिस्सा दान करते हैं, जबकि हिंदू इस मामले में पीछे हैं।
अंत में, धीरेंद्र शास्त्री का संदेश था कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करना होगा और गो-माता की रक्षा करनी होगी। यह तभी संभव है जब हम जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद को प्राथमिकता दें।




