Swarn Kalash Jeenmata Mandir: सीकर के जीणमाता मंदिर के शिखर पर सजा स्वर्ण कलश, भक्तों में धार्मिक उत्साह

Sikar Jeenmata Mandir: सीकर के जीणमाता मंदिर में स्वर्ण कलश की स्थापना से भक्तों में धार्मिक उत्साह का माहौल है। इस पवित्र आयोजन में 1.25 किलो सोने से जड़ा कलश और 3.5 किलो चांदी की ध्वजा स्थापित की गई। मकराना के संगमरमर से निर्मित नए शिखर के साथ, दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए।

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Rajasthan Desk - News
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Swarn Shikhar Installation at Sikar Jeenmata Temple

Swarn Kalash Jeenmata Mandir: शनिवार को सीकर के प्रसिद्ध जीणमाता मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश स्थापना से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह की लहर दौड़ गई। इस स्वर्ण कलश को 1.25 किलो सोने से जड़ा गया है, जिसे देख श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इसके साथ ही, मंदिर के शिखर पर 3.5 किलो चांदी की ध्वजा भी फहराई गई। मंदिर के नए शिखर का निर्माण मकराना के मशहूर संगमरमर से किया गया है और इसे पूर्ण होने में लगभग पांच साल का समय लगा। इस भव्य आयोजन के दौरान दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न तीर्थस्थलों से लाए गए पवित्र जल का उपयोग हुआ।

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स्वर्ण कलश की चकाचौंध से दिपा मंदिर

इस धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर के पुजारी भवानी शंकर ने बताया कि शिखर के निर्माण में मकराना के सफेद संगमरमर का उपयोग हुआ, जिससे मंदिर की अद्भुत भव्यता और अधिक बढ़ गई है। शिखर पर स्थापित सवा क्विंटल तांबे का कलश अपनी स्वर्णिम आभा से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। इसके साथ ही, गरुड़ महाराज, नंदी और शेर की सवारी की मूर्तियां भी शिखर की शोभा बढ़ा रही हैं।

हवन-पूजन से गूंजा मंदिर परिसर

धार्मिक आयोजन की शुरुआत 13 मार्च से हुई, जहां हवन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। जीणमाता मंदिर के पुजारियों ने इसमें हिस्सा लिया और आहुतियां दीं। आयोजन में खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी और शाकंभरी देवी सहित प्रमुख तीर्थस्थलों से जल लाया गया। इसके अलावा गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों का जल भी शामिल किया गया।

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श्रद्धालुओं की लंबे समय से थी प्रतीक्षा

मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी नंद किशोर ने बताया कि श्रद्धालुओं की यह लम्बी प्रतीक्षा अब समाप्त हुई जब स्वर्ण कलश को शिखर पर स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि इससे मंदिर की भव्यता बढ़ गई है और अब भक्तगण दूर से ही इसे देख सकते हैं। शनिवार को दक्षिण मुखी बालाजी मंदिर से जीणमाता मंदिर तक कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस आयोजन के साथ ही मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया, जहां भक्तों ने प्रसादी ग्रहण कर इस पवित्र क्षण का आनंद उठाया। मंदिर की भव्यता और धार्मिक उत्सव ने श्रद्धालुओं के मन में अपार श्रद्धा और विश्वास को और भी प्रगाढ़ किया।

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