Madan Dilawar Action: राजस्थान सरकार के पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर के दौरे के बाद विभाग में बड़ी कार्रवाई की गई है। स्वच्छता अभियान में भारी लापरवाही मिलने पर विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 11 अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मंत्री ने अपने हालिया दौरे के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी और लापरवाह अधिकारियों को सुधार की चेतावनी दी थी। अब इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
विभागीय आदेशों के आने के बाद कई अधिकारियों के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी गई है। विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से लगातार हो रही बयानबाजी के बीच सरकार ने यह कड़ा संदेश देने की कोशिश की है कि काम में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
किन अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज?
विभाग की ओर से जारी की गई सूची में कई बड़े पद के अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इन सभी पर स्वच्छता मानकों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है। निलंबित होने वाले अधिकारियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- रोमा सहारण, विकास अधिकारी, लक्ष्मणगढ़
- दिलीप कुमार सोनी, सहायक विकास अधिकारी, रतनगढ़
- बनवारीलाल मीणा, अतिरिक्त विकास अधिकारी, लक्ष्मणगढ़
- गोपेश कुमार निराला, सहायक अभियंता, रतनगढ़
- रामप्रसाद बगड़िया, प्रगति प्रसार अधिकारी, पिपरली
- वीरेन्द्र चाहर, सहायक अभियंता, लक्ष्मणगढ़
- सुरेन्द्र कुमार शर्मा, कार्यवाहक विकास अधिकारी
- बीरबल सिंह, सहायक विकास अधिकारी
- महेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता, पलसाना
- रतनलाल गुर्जर, अतिरिक्त विकास अधिकारी, पिपरली
- जगदीश व्यास, विकास अधिकारी, रतनगढ़
नोटिस और पदमुक्ति के पीछे की असली वजह क्या है?
निलंबन के अलावा चूरू और सीकर के जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के को-ऑर्डिनेटरों को भी उनके पद से हटा दिया गया है। सांवलोदा धायलान और जसरासर ग्राम पंचायतों के प्रशासकों पर भी कार्रवाई की गाज गिरी है। ग्राम विकास अधिकारियों को भी स्वच्छता के मोर्चे पर विफल रहने के कारण घर बैठा दिया गया है।
क्या संसाधनों की कमी है इस बदहाली का मुख्य कारण?
मंत्री की इस कड़ी कार्रवाई के बाद विभागीय कर्मचारियों में डर का माहौल है। हालांकि कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सफाई के लिए बजट की भारी कमी है। उनका कहना है कि पर्याप्त संसाधन और सफाई कर्मी न होने के कारण जमीनी स्तर पर काम करना मुश्किल हो रहा है। बजट के अभाव में व्यवस्थाएं सुधारने की कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं, जिसका नतीजा अब निलंबन के रूप में सामने आया है।




