BJP Tribal Strategy: राजस्थान की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की अहमियत को समझते हुए भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा दांव खेला है। भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गोपीचंद मीणा ने अपनी नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। इस 76 सदस्यीय विस्तृत टीम में मेवाड़ से लेकर पूर्वी राजस्थान तक के समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। यह कदम आगामी चुनावों में विपक्ष और क्षेत्रीय दलों के प्रभाव को कम करने के लिए भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा की नई कार्यकारिणी में किन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी?
पार्टी ने इस बार अनुभव और युवा जोश का मिश्रण तैयार किया है। कार्यकारिणी में उन चेहरों को जगह दी गई है जो जमीनी स्तर पर पकड़ रखते हैं। इसमें जातिगत संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा गया है ताकि भील और मीणा समुदाय के बीच तालमेल बना रहे।
- विजय मीणा (जयपुर), अमृतलाल कलासुआ (डूंगरपुर) और डॉ. ममता मीणा (सवाई माधोपुर) को उपाध्यक्ष पद सौंपा गया है।
- महेंद्र चांदा और राजेश कटारा को महामंत्री बनाया गया है ताकि अलग-अलग जिलों में पार्टी का काम सुचारू रह सके।
- संगठन में 19 प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई है जो पार्टी की बात जनता के बीच रखेंगे।
- सोशल मीडिया और आईटी विभाग के लिए विशेष टीम तैयार की गई है।
मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र पर ही पार्टी का इतना जोर क्यों है?
पिछले कुछ समय में दक्षिण राजस्थान में क्षेत्रीय दलों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। इसी को देखते हुए भाजपा ने डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर बेल्ट में अपनी ताकत झोंक दी है। पार्टी का लक्ष्य उन इलाकों में अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाना है जहां भारत आदिवासी पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है। वहीं, पूर्वी राजस्थान के दौसा और धौलपुर जैसे जिलों में भी पुराने नेताओं को नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतारा गया है।
डिजिटल दुनिया में कैसे मुकाबला करेगी भाजपा की यह टीम?
अब प्रचार का तरीका बदल गया है, इसलिए भाजपा ने तकनीक पर ज्यादा भरोसा जताया है। आदिवासी युवाओं को प्रभावित करने के लिए अब रील्स और सोशल मीडिया पोस्ट का सहारा लिया जाएगा। जमुना लाल मीणा और रिंकू मीणा जैसे नेताओं को आईटी और सोशल मीडिया की कमान दी गई है। इनका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक पहुंचाना है। इस रणनीति के जरिए पार्टी सीधे युवाओं के मोबाइल फोन तक पहुंचना चाहती है।


