Rajkot Veja Village: गुजरात के राजकोट में स्थित वेजा गांव इन दिनों मच्छरों की भारी फौज से जूझ रहा है। हालत इतनी खराब हो चुकी है कि ग्रामीणों का चैन से जीना दूभर हो गया है। गांव के पास से बहने वाली नदी में गंदगी और प्रदूषित पानी की वजह से जलकुंभी का जाल बिछ गया है। यही वह जगह है जहां करोड़ों की तादाद में मच्छर पैदा हो रहे हैं। दिन भर ये मच्छर पानी की लताओं में छिपे रहते हैं और सूरज ढलते ही पूरे गांव पर हमला बोल देते हैं।
रिश्तेदार और मेहमान गांव में रुकने से क्यों कतराते हैं?
गांव की स्थिति ऐसी हो गई है कि बाहर से आने वाले लोग शाम होने से पहले ही वहां से निकलने में अपनी भलाई समझते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात में मच्छरों के बीच रुकना किसी चुनौती से कम नहीं है। रास्तों पर चलते समय मच्छर नाक और मुंह तक में घुस जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गांव वालों को अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। उन्हें डर है कि गंदगी और मच्छरों के इस माहौल को देखकर कोई भी अपनी बेटी का रिश्ता उनके गांव में नहीं करेगा।
बेजुबान पशुओं को बचाने के लिए क्या उपाय किए गए?
इंसानों के साथ-साथ यहां के मवेशी भी इस मुसीबत का शिकार हो रहे हैं। मच्छरों के हमले से पशुओं को बचाने के लिए ग्रामीणों ने अनोखा तरीका निकाला है।
- गांव वालों ने गाय और भैंसों के लिए विशालकाय मच्छरदानियां बनवाई हैं।
- मच्छरों के काटने से पशु बीमार पड़ रहे हैं और उनकी दूध देने की क्षमता घट गई है।
- प्रशासनिक सीमाओं के विवाद में यह गांव दो हिस्सों (नगर निगम और रूडा) में बंटा है, जिससे समाधान नहीं हो पा रहा है।
इस गंभीर समस्या का आखिर समाधान क्या है?
मच्छरों की जड़ यानी जलकुंभी को खत्म करने के लिए प्रशासन अब नई तकनीक पर विचार कर रहा है। राजकोट नगर निगम के कमिश्नर ने बताया कि मशीन से सफाई के बाद भी जलकुंभी दोबारा उग आती है। इसके स्थाई समाधान के लिए लखनऊ नगर निगम की मदद ली जा रही है। वहां गोमती नदी की सफाई में इस्तेमाल हुई ‘ट्रैश अरेस्टर’ तकनीक को अब राजकोट में भी लागू करने की योजना है। चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा ताकि गांव वालों को राहत मिल सके।
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