Japan Earthquake: जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार को धरती कांपने से कोहराम मच गया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई है। इस शक्तिशाली झटके के फौरन बाद प्रशासन ने समंदर किनारे बसे इलाकों में सुनामी का खतरा घोषित कर दिया है। नेशनल ब्रॉडकास्टर एनएचके की रिपोर्ट के मुताबिक, इवाते और होक्काइडो के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को ऊंचे स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा विभाग ने अंदेशा जताया है कि समुद्र में करीब 3 मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं, जो रिहायशी इलाकों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
सुनामी की लहरों से कितना बड़ा खतरा है?
जापान सरकार ने नागरिकों को आगाह किया है कि सुनामी एक बार आकर शांत नहीं होती, बल्कि इसकी लहरें कतार में बार-बार हमला कर सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि समंदर से उठने वाला पानी अनुमानित समय से पहले भी पहुंच सकता है और इसकी ऊंचाई बताए गए आंकड़े से ज्यादा भी हो सकती है। जब तक सरकार की ओर से पूरी तरह खतरा टलने की घोषणा न हो जाए, तब तक लोगों को सुरक्षित जगहों पर ही टिके रहने को कहा गया है।
जापान में ही आखिर क्यों आते हैं इतने ज्यादा भूकंप?
जापान की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि वह दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र ‘रिंग ऑफ फायर’ पर बसा है। यहां चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स एक-दूसरे से मिलती हैं, जिनकी हलचल से जमीन हिलती रहती है। यही कारण है कि वहां रहने वाले लोग हमेशा आपदा के साये में रहते हैं।
- जापान में हर साल छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 1500 भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं।
- दुनिया भर में आने वाले कुल भूकंपों का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा अकेले जापान में दर्ज होता है।
- साल 2011 में यहां आए भीषण भूकंप और सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें करीब 18,500 लोग मारे गए थे।
- वर्तमान भूकंप के बाद बचाव दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है।
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