Nida Khan: कहां छिपी है निदा खान? टीसीएस कांड की आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने तैयार किया नया प्लान

Nida Khan: टीसीएस नासिक केस की आरोपी निदा खान की तलाश में पुलिस ने तीन टीमें लगाई हैं. धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न के आरोपों के बाद निदा खान फरार है.

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Rajasthan Desk - News
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Nida Khan: आईटी कंपनी टीसीएस के नासिक कार्यालय में मचे बवाल की मुख्य आरोपी निदा खान की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने घेराबंदी तेज कर दी है. कोर्ट से अंतरिम राहत न मिलने के बाद अब पुलिस की तीन अलग-अलग टीमें उसकी लोकेशन को ट्रैक कर रही हैं. पुलिस के अनुसार, निदा खान पर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं. इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं. निदा खान ने अपनी गर्भावस्था का हवाला देकर कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी, लेकिन 27 अप्रैल तक के लिए इसकी सुनवाई टाल दी गई है.

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टीसीएस के इस मामले में आखिर क्या है पूरा विवाद?

नासिक की आईटी कंपनी में सामने आया यह मामला केवल कार्यस्थल पर विवाद नहीं है, बल्कि इसमें यौन उत्पीड़न से लेकर धर्म परिवर्तन तक के आरोप शामिल हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अब तक इस प्रकरण में कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिसमें आठ आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है. निदा खान पर आरोप है कि उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया और पीड़ितों पर मानसिक तनाव पैदा किया.

  • इस मामले में अब तक पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है.
  • निदा खान सहित कुल 5 लोगों को एक विशेष एफआईआर में आरोपी बनाया गया है.
  • पीड़ितों की उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है और वे करीब 20 हजार रुपये वेतन पर कार्य करती थीं.
  • आरोप है कि शिवलिंग और महाभारत के पात्रों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं.
  • टीसीएस ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है.

क्यों नहीं मिल सकी आरोपी को कानूनी राहत?

निदा खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी. अपनी याचिका में उसने गर्भवती होने का तर्क दिया था, लेकिन अदालत ने उसे फिलहाल कोई राहत नहीं दी. पुलिस का मानना है कि निदा खान और उसके साथी दानिश शेख ने मिलकर लड़कियों को अपने जाल में फंसाया था. जांच में यह बात भी सामने आई है कि कंपनी की आंतरिक समिति यानी पॉश (POSH) के पास इन पीड़ितों की शिकायत समय पर नहीं पहुंची, जिसके पीछे तकनीकी खामियां भी हो सकती हैं.

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