Sachin Pilot: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जबरदस्त सफलता का असर अब राजस्थान की राजनीति पर दिखने लगा है। इस जीत के बाद राजस्थान कांग्रेस के भीतर एक बार फिर नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। केरल में चुनाव प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट की सक्रियता और वहां मिली बड़ी कामयाबी को आधार बनाकर उनके समर्थक अब राजस्थान में उन्हें आगे करने की वकालत कर रहे हैं। पायलट समर्थकों का मानना है कि पार्टी को उनकी मेहनत का फल राज्य में भी मिलना चाहिए।
क्या राजस्थान में बदल जाएगी कांग्रेस की कमान?
सचिन पायलट के करीबी नेता और टोंक में उनकी जिम्मेदारी संभालने वाले महेंद्र सिंह ने मुखर होकर पायलट को प्रदेश में संगठन की बागडोर सौंपने की मांग की है। पायलट समर्थकों का दावा है कि अगर आगामी चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जाता है, तो राजस्थान में भी केरल जैसा जादुई परिणाम देखने को मिल सकता है। इस मांग ने गहलोत खेमे में खलबली पैदा कर दी है, क्योंकि वर्तमान में संगठन पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गुट की पकड़ मजबूत मानी जाती है।
विपक्ष ने कैसे ली कांग्रेस के झगड़े में चुटकी?
कांग्रेस की इस अंदरूनी जंग में अब भाजपा भी कूद पड़ी है। जयपुर के आदर्श नगर से भाजपा नेता रवि नैयर ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस ने पायलट जैसे नेताओं की हमेशा अनदेखी की है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर राहुल गांधी की जगह पायलट के हाथ में कमान होती, तो कांग्रेस की हालत इतनी खराब नहीं होती। भाजपा का कहना है कि पायलट को उनके काम का इनाम मिलना ही चाहिए।
पायलट और गहलोत के बीच विवाद के मुख्य बिंदु
- केरल में कांग्रेस की भारी जीत का श्रेय सचिन पायलट की रणनीति को दिया जा रहा है।
- अशोक गहलोत ने हाल ही में कहा था कि पायलट अब पूरी तरह कांग्रेस के साथ हैं और कहीं नहीं जाएंगे।
- सोशल मीडिया पर पायलट को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का अभियान तेज हो गया है।
- भाजपा ने कांग्रेस पर पायलट के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
- राजस्थान कांग्रेस फिलहाल सरकार का विरोध करने के बजाय आपसी गुटबाजी में उलझी दिख रही है।
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