Suman Kalyanpur: मोहम्मद रफी के साथ 140 से ज्यादा सुपरहिट गाने देने वाली और करीब 740 गानों को अपनी आवाज से सजाने वाली सुमन कल्याणपुर का संगीत सफर जितना शानदार रहा, उतना ही वह एक अजीब कशमकश से भी जूझती रहीं। हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर में जब रेडियो पर गाने बजते थे, तो अक्सर लोग उनकी आवाज सुनकर धोखा खा जाते थे। विडंबना देखिए कि उनकी सुरीली आवाज ही उनकी सबसे बड़ी बाधा बन गई क्योंकि दुनिया उन्हें सुमन कल्याणपुर के बजाय लता मंगेशकर समझने की भूल कर बैठती थी। यह भ्रम इस कदर था कि रेडियो पर गायक का नाम न बताए जाने की वजह से सालों तक श्रोता उनके गाए गानों का श्रेय लता जी को ही देते रहे और कई रिकॉर्ड्स पर भी गलत जानकारी दर्ज हो गई।
क्या सच में आवाज की समानता एक अभिशाप बन गई?
28 जनवरी 1937 को जन्मीं सुमन कल्याणपुर ने जब 1954 में अपने करियर की शुरुआत की, तो बहुत जल्द वह फिल्म इंडस्ट्री की चहेती बन गईं। हालांकि, उनकी आवाज की कोमलता और शैली लता मंगेशकर से इतनी ज्यादा मेल खाती थी कि उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। सुमन ने खुद एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि वह कॉलेज के दिनों में लता जी के गानों से बहुत प्रभावित थीं और उनकी आवाज कुदरती तौर पर पतली थी, जिससे समानता होना स्वाभाविक था। लेकिन वह इस तुलना से कभी खुश नहीं रहीं क्योंकि वह चाहती थीं कि दुनिया उन्हें उनके अपने हुनर और नाम से पहचाने। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी और भोजपुरी जैसी कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा लेकिन वह ‘लता जैसी आवाज’ वाला टैग कभी पूरी तरह नहीं हटा पाईं।
मोहम्मद रफी के साथ कैसे जमी सुमन की जोड़ी?
सुमन कल्याणपुर के करियर में मोहम्मद रफी का साथ सबसे अहम रहा। इन दोनों दिग्गजों की जोड़ी ने एक के बाद एक कई यादगार हिट्स दिए, जिनमें फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ का सदाबहार गाना ‘आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ आज भी हर पार्टी की शान होता है। रफी साहब के साथ उनकी ट्यूनिंग इतनी बेहतरीन थी कि उनके गाए 140 से ज्यादा युगल गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा लिस्ट में शामिल हैं। सुमन को पहला बड़ा मौका दिलाने के पीछे मशहूर गायक तलत महमूद का हाथ था। तलत ने एक कार्यक्रम में सुमन की प्रतिभा को पहचाना और फिल्म ‘दरवाजा’ में उन्हें अपने साथ गाने का अवसर दिया। यही वह मोड़ था जिसने उन्हें गुमनामी से निकालकर सफलता के शिखर की ओर बढ़ा दिया, जहां उन्होंने अपनी एक अलग और सम्मानित जगह बनाई।
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