Rajasthan Panchayat Elections: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की तारीखें आईं सामने, जानिए कब होंगे मतदान

Rajasthan Panchayat Elections: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तारीखों का एलान हो गया है। सरकार ने हाईकोर्ट में पूरा चुनावी शेड्यूल पेश कर दिया है।

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Rajasthan Desk - News
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Rajasthan Panchayat Elections: राजस्थान में काफी समय से टल रहे पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर स्थिति साफ हो गई है। राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अदालती सुनवाई के दौरान आगामी चुनावों का पूरा कार्यक्रम पेश कर दिया है। अदालत ने इस नए चुनावी कार्यक्रम को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके तहत अगस्त महीने में अधिसूचना जारी होने के साथ चुनावी सरगर्मियां शुरू हो जाएंगी और नवंबर के मध्य तक पूरी प्रक्रिया को अमली जामा पहना दिया जाएगा।

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चुनावी कार्यक्रम की महत्वपूर्ण तारीखें क्या हैं?

हाईकोर्ट में सरकार द्वारा पेश किए गए नए शेड्यूल के अनुसार चुनाव चरणबद्ध तरीके से संपन्न कराए जाएंगे। इस कार्यक्रम की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • 17 अगस्त को राज्य में चुनाव कार्यक्रम का आधिकारिक एलान कर दिया जाएगा।
  • 22 अगस्त को इन स्थानीय चुनावों के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
  • 19 सितंबर को नगर निकायों के अध्यक्षों यानी चेयरमैन पद के लिए मतदान होगा।
  • 20 सितंबर को उपाध्यक्ष यानी वाइस चेयरमैन पद के लिए चुनाव कराए जाएंगे।
  • 23 सितंबर से पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।
  • 15 नवंबर 2026 तक राज्य में इस पूरी चुनाव प्रक्रिया को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।

हाईकोर्ट की अदालत में पिछली सुनवाई के दौरान क्या हुआ था?

इस मामले में पिछली सुनवाई के वक्त अदालत ने चुनाव कराने में हो रही लगातार देरी को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयुक्त और ओबीसी आयोग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें तलब किया था। कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह अगली सुनवाई तक किसी भी हाल में चुनाव की निश्चित तारीखों का कार्यक्रम लेकर कोर्ट में हाजिर हो। इसी न्यायिक दबाव के बीच सरकार यह नया टाइमलाइन चार्ट लेकर कोर्ट पहुंची थी।

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यह नया समय पत्रक लगभग उसी अवधि के समान है जिसका सुझाव राज्य निर्वाचन आयोग पहले दे रहा था। निर्वाचन आयोग ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद तीन महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराने की बात कही थी। इससे पहले सरकार ने अगस्त के अंत तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट देने की समय सीमा तय की थी, जिसके बाद के 90 दिन नवंबर के मध्य में पूरे हो रहे हैं। हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष ने इस समय सीमा का विरोध किया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया।

आरक्षण के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग का क्या पक्ष था?

चुनाव टलने के बीच सीटों के आरक्षण का मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ था। इस बारे में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने साफ किया था कि पिछड़ा वर्ग, एससी, एसटी और महिलाओं के लिए पदों का आरक्षण तय करने का अधिकार आयोग के पास नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह सरकार के कार्यक्षेत्र में आता है। निर्वाचन आयुक्त ने कहा था कि आरक्षण की प्रक्रिया सरकार जैसे ही पूरी करके देगी, आयोग उसके ठीक दो दिन बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित करने को तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि समय पर चुनाव कराने के लिए आयोग की ओर से सरकार को कई बार पत्र भी लिखे जा चुके थे।

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