NEET UG Exam: राजस्थान के सीकर जिले से सफलता की एक बेहद खास कहानी सामने आई है। लक्ष्मणगढ़ के बगड़ियों का बास में रहने वाले एक शिक्षक परिवार की दो पीढ़ियों ने एक साथ कामयाबी का परचम लहराया है। इस परिवार की बेटी अभिलाषा चौधरी ने जहां मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में शानदार अंक हासिल किए हैं, वहीं उनकी मां सुमन चौधरी का चयन स्कूल व्याख्याता के पद पर हुआ है। एक ही घर में आई इन दोहरी खुशियों ने पूरे इलाके को गौरवान्वित कर दिया है।
कैसे मुमकिन हुई एक ही घर में दो बड़ी सफलताएं?
अभिलाषा चौधरी ने नीट की परीक्षा में 720 में से 636 अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा साबित की। उन्होंने पूरे भारत में 2760वीं रैंक हासिल की है, जबकि ओबीसी वर्ग में वह 1019वें स्थान पर रहीं। दिलचस्प बात यह है कि अभिलाषा ने पिछले साल बांसवाड़ा का सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने के बाद भी दाखिला नहीं लिया था। उन्होंने खुद पर भरोसा जताया और एक साल का ब्रेक लेकर फिर से तैयारी की। उनका यह साहसी फैसला सही साबित हुआ और अब उन्हें देश के टॉप मेडिकल कॉलेज में पढ़ने का मौका मिलेगा।
मां की तीसरी सरकारी नौकरी की क्या है कहानी?
बेटी की सफलता के साथ-साथ मां सुमन चौधरी ने भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सुमन का चयन राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित स्कूल व्याख्याता भर्ती में हिंदी विषय से हुआ है। उन्होंने इस परीक्षा में पूरे प्रदेश में 113वीं रैंक प्राप्त की है। सुमन चौधरी के लिए सरकारी सेवा में आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन उनकी निरंतरता काबिल-ए-तारीफ है।
- सुमन का पहली बार सरकारी नौकरी में चयन साल 2017 में लेवल-2 शिक्षक के तौर पर हुआ था।
- दूसरी बार वर्ष 2019 में उन्होंने लेवल-1 शिक्षक की परीक्षा पास की।
- अब तीसरी बार वह हिंदी की व्याख्याता (लेक्चरर) के रूप में अपनी सेवाएं देंगी।
- अभिलाषा ने अपनी सफलता का श्रेय पुराने पेपरों के अभ्यास और नियमित पढ़ाई को दिया है।
क्या है इस शिक्षक परिवार का बैकग्राउंड?
इस घर की नींव ही शिक्षा पर टिकी है। अभिलाषा के पिता मनोज कुमार बगड़िया खुद एक सरकारी शिक्षक हैं, जबकि उनके दादा ओमप्रकाश बगड़िया भी शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। इतना ही नहीं, उनकी चाची प्रियंका भी सरकारी शिक्षक के पद पर तैनात हैं और चाचा सुभाष दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं। घर के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई को केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि समाज की सेवा का माध्यम माना है। सुमन ने घर की जिम्मेदारियां निभाते हुए जिस तरह पढ़ाई जारी रखी, वह आज प्रदेश की कई महिलाओं के लिए मिसाल बन गई है।
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