Hema Malini on Dharmendra: धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा बताते हुए टूटीं हेमा मालिनी, बेटियों के दर्द पर किया बड़ा खुलासा

Hema Malini on Dharmendra: धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा और बेटियों के दुख पर हेमा मालिनी का भावुक खुलासा, जानें साल 2026 के सम्मान की पूरी कहानी।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Hema Malini on Dharmendra: अपनी अंतिम सांसें गिनते वक्त भी हिंदी सिनेमा के ही-मैन धर्मेंद्र के जेहन में सिर्फ अपना परिवार ही था। वह चाहते थे कि उनके जाने के बाद भी पूरा कुनबा हमेशा एक सूत्र में बंधा रहे और एकता ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रहे। उनकी पत्नी और मशहूर अदाकारा हेमा मालिनी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान धर्मेंद्र की इस आखिरी इच्छा का खुलासा करते हुए बताया कि धरम जी हमेशा परिवार की एकजुटता पर जोर देते थे। 24 नवंबर 2025 को दुनिया को अलविदा कहने वाले धर्मेंद्र आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी उनके घर की दीवारों में गूंजती हैं। हेमा मालिनी ने बताया कि उनके पति की जगह कोई भी नहीं ले सकता क्योंकि वह न केवल एक शानदार जीवनसाथी थे बल्कि उनके करियर और निजी जीवन की सबसे बड़ी ताकत भी थे।

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क्या पिता के जाने के गम से उबर पाई हैं ईशा और अहाना?

पिता के जाने का सबसे गहरा जख्म धर्मेंद्र की बेटियों ईशा देओल और अहाना देओल के दिल पर लगा है। हेमा मालिनी ने रिपब्लिक टीवी से बातचीत में अपने दिल का हाल साझा करते हुए बताया कि एक मां के लिए अपनी बेटियों को इस तरह तड़पते देखना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईशा और अहाना अभी तक इस बड़े सदमे से बाहर नहीं आ पाई हैं और परिवार में पिता की कमी उन्हें हर पल महसूस होती है। हेमा के अनुसार बेटियों से मिलने वाले भावुक संदेश इस बात का गवाह हैं कि धर्मेंद्र का जाना एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। घर के मौजूदा हालात आज भी काफी गमगीन हैं और पूरा परिवार मिलकर इस दुख से लड़ने की कोशिश कर रहा है।

शादी के बाद कैसा था हेमा और धर्मेंद्र का रिश्ता?

अक्सर लोग सोचते हैं कि शादी के बाद अभिनेत्रियों पर पाबंदियां लग जाती हैं, लेकिन धर्मेंद्र के मामले में कहानी बिल्कुल उलट थी। हेमा मालिनी ने बताया कि धर्मेंद्र ने कभी भी उन पर कोई बंदिश नहीं लगाई। वह जानते थे कि हेमा एक समर्पित कलाकार और नृत्यांगना हैं, इसलिए उन्होंने हमेशा हेमा को अभिनय और डांस जारी रखने के लिए प्रेरित किया। धर्मेंद्र का मानना था कि हेमा को अपना काम कभी नहीं छोड़ना चाहिए। इसी प्रोत्साहन का नतीजा था कि हेमा मालिनी अपने करियर के शिखर पर बनी रहीं। हेमा आज भी ईश्वर की आभारी हैं कि उन्हें धर्मेंद्र जैसा जीवनसाथी मिला जिसने हर मोड़ पर उनका साथ दिया।

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मरणोपरांत सम्मान और वो आखिरी पल

धर्मेंद्र के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और यही वजह है कि मई 2026 में उन्हें मरणोपरांत प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया। इस सम्मान को स्वीकार करने जब हेमा मालिनी पहुंचीं, तो वहां भी उनकी आंखें अपने पति के संघर्षों और उपलब्धियों को याद कर नम हो गईं। लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बाद अस्पताल में धर्मेंद्र ने दम तोड़ा था, लेकिन उनके जाने के बाद भी उनका सम्मान कम नहीं हुआ। हिंदी रश को दिए एक अन्य इंटरव्यू में हेमा ने बताया कि धर्मेंद्र का स्पष्ट संदेश था कि काम चाहे जो भी हो, परिवार की एकता को हमेशा पहली प्राथमिकता देनी चाहिए और आज उनका पूरा परिवार इसी रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहा है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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