Sikar STP Plant Controversy: सीकर के हाउसिंग बोर्ड इलाके में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की जांच करने पहुंचे अधिकारियों के सामने जमकर हंगामा हुआ। मंगलवार को जब प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम वहां पहुंची, तो स्थानीय निवासियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी जुट गए। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हो गई और वे आपस में भिड़ गए। मोहल्ले के लोगों ने प्लांट से आने वाली तेज दुर्गंध की शिकायत करते हुए इसे रिहायशी इलाके से दूर कहीं और शिफ्ट करने की पुरजोर मांग की है।
निरीक्षण के दौरान आखिर हंगामा क्यों हुआ?
प्रशासनिक अधिकारियों की टीम यह देखने पहुंची थी कि एसटीपी प्लांट से नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। टीम में नगर परिषद और प्रदूषण विभाग के अफसर शामिल थे। वे यह जांचने आए थे कि प्लांट आबादी क्षेत्र से कितनी दूर है और वहां से वास्तव में बदबू आ रही है या नहीं। इसी दौरान कांग्रेस के पूर्व पार्षद अशोक चौधरी और भाजपा कार्यकर्ता यशस्वी राठौड़ के बीच विवाद शुरू हो गया। माहौल बिगड़ता देख वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
क्या है लोक अदालत का इस मामले पर आदेश?
यह पूरा मामला न्यायालय स्थाई लोक अदालत तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने पहले ही इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कुछ निर्देश दिए थे। इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- स्थाई लोक अदालत ने जून 2026 में मोहल्ले के पास बने इस प्लांट को बंद करने का आदेश जारी किया था।
- कोर्ट का कहना था कि अधिकारी जनता की मौजूदगी में मौके की जांच करें।
- यदि बदबू की समस्या सही पाई जाती है, तो नगर परिषद को आबादी से 500 मीटर दूर प्लांट लगाने की छूट होगी।
- इस प्लांट से शहर के लगभग 12,000 सीवरेज कनेक्शन जुड़े हुए हैं।
- प्लांट की नींव फरवरी 2021 में पूर्व मंत्री राजेंद्र पारीक और तत्कालीन सभापति द्वारा रखी गई थी।
स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह, किस्तूर और हरफूल सहित कई लोगों ने अदालत में याचिका लगाई थी। उनका कहना है कि प्लांट के कारण मोहल्ले में रहना दूभर हो गया है। अब अधिकारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश करेंगे, जिसके बाद ही इस प्लांट के भविष्य पर अंतिम फैसला होगा।
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