PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में हालात बेहद डरावने हो चुके हैं। यहां अपने हक की मांग कर रहे आम नागरिकों पर पाकिस्तानी फौज ने बेरहमी से गोलियां बरसाई हैं। सड़कों पर जगह-जगह प्रदर्शनकारियों के शव पड़े नजर आ रहे हैं, जिसकी तुलना जलियांवाला बाग हत्याकांड से की जा रही है। रावलकोट से मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ रहे ‘अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च’ को रोकने के लिए सेना ने न सिर्फ आंसू गैस के गोले छोड़े, बल्कि निहत्थे लोगों पर सीधी फायरिंग भी की। इस खूनी संघर्ष में बड़े नागरिक नेता उमर नजीर कश्मीरी के भाई उस्मान नजीर की भी जान चली गई है।
पीओके की सड़कों पर क्यों मची है चीख-पुकार?
क्षेत्र में बुनियादी मानवाधिकारों और सम्मान के लिए शुरू हुआ यह आंदोलन अब बड़े नरसंहार में तब्दील होता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना के जनरल असीम मुनीर इस घाटी को लाशों से पाट देना चाहते हैं। ताजा हिंसा उस समय भड़की जब वहां विधानसभा चुनावों के पहले चरण की वोटिंग हो रही थी। इस दौरान कई केंद्रों पर धांधली और मतपेटियों में आग लगाने की खबरें भी सामने आई हैं।
हिंसा के आंकड़े क्या बयां कर रहे हैं?
- 5 जून से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक 80 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
- बीते 24 घंटों के भीतर रावलकोट और मीरपुर जैसे इलाकों में 19 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।
- ताजा सैन्य कार्रवाई में 14 से 20 लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की खबर है।
- प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही अवामी एक्शन कमेटी ने उस्मान नजीर की मौत को एक बड़ी कुर्बानी बताया है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी होने के बावजूद वैश्विक मीडिया में इस हिंसा को लेकर सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, सेना की इस कार्रवाई के बाद लोगों में भारी गुस्सा है और आने वाले दिनों में स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है।
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