Rajasthan Government: राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, प्रसूताओं को बिना रक्तदान मिलेगा ब्लड

Rajasthan Government Blood Decision: राजस्थान सरकार ने प्रसूताओं की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को बिना रिप्लेसमेंट डोनर के खून मिल सकेगा।

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Rajasthan Desk - News
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Rajasthan Government: राजस्थान की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को खून चढ़ाने के लिए उनके परिजनों को बदले में रक्तदान करने की कोई जरूरत नहीं होगी। सरकार ने प्रसूताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह संवेदनशील फैसला किया है। इस संबंध में राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की तरफ से नए दिशा-निर्देश भी लागू कर दिए गए हैं।

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यह व्यवस्था उन सभी महिलाओं के लिए जीवनदायिनी साबित होगी जो प्रसव के लिए अस्पताल आती हैं या जो पहले से ही गंभीर एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में अक्सर परिजनों को तुरंत खून का इंतजाम करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। सरकार के इस कदम से अब समय पर इलाज मिल सकेगा और ब्लड बैंक से सीधे खून उपलब्ध कराया जाएगा।

आखिर क्यों उठाना पड़ा सरकार को यह बड़ा कदम?

पिछले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों में प्रसूताओं की मौत के दुखद मामले सामने आए थे। मई महीने से अब तक पांच अलग-अलग जिलों में करीब 19 गर्भवती महिलाओं की जान जाने की खबर है। जांच में यह सामने आया कि ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं और ब्लीडिंग के वक्त खून मिलने में हुई देरी इन मौतों की मुख्य वजह थी। इसी खतरे को टालने के लिए सरकार ने सीधे ब्लड बैंक से बिना किसी शर्त के खून और प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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किन मरीजों को पहले से मिल रही थी यह खास सुविधा?

इससे पहले तक अस्पतालों में बिना रिप्लेसमेंट डोनर के खून देने की नीति बेहद सीमित श्रेणियों के लिए ही लागू थी। नए नियमों के तहत अब इस दायरे को काफी बड़ा कर दिया गया है। पहले इन मरीजों को यह सुविधा मिल रही थी:

  • थैलेसीमिया रोग से पीड़ित मरीजों को बिना डोनर खून दिया जाता है।
  • सिकल सेल एनीमिया बीमारी से ग्रसित लोगों को भी यह राहत मिलती है।
  • सड़क हादसों या अन्य गंभीर चोट वाले मरीजों को तत्काल ब्लड दिया जाता है।
  • 14 साल से कम उम्र की बच्चियों के इलाज में भी रिप्लेसमेंट डोनर की शर्त नहीं होती है।

रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए क्या है प्रशासन की योजना?

अस्पतालों में बिना रिप्लेसमेंट के खून देने से ब्लड बैंकों पर स्टॉक बनाए रखने का भारी दबाव पड़ेगा। इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। विभाग अब गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और कॉलेजों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करेगा। इसके साथ ही हर क्षेत्र में दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले डोनर्स की एक विशेष सूची भी तैयार की जाएगी ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद ली जा सके।

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