Ayushman Bharat Card: केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। देशभर में इलाज के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले 2,359 अस्पतालों को इस योजना की सूची से हटा दिया गया है। सरकार की इस कार्रवाई से उन अस्पतालों में हड़कंप मच गया है जो गलत तरीके से पैसे कमाने की कोशिश कर रहे थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि मरीजों के हक से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
क्यों हुई अस्पतालों पर कार्रवाई?
सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अस्पताल इस योजना का गलत फायदा उठा रहे हैं। जांच में सामने आया कि कई जगह फर्जी बिल बनाए जा रहे थे और बिना जरूरत के ऑपरेशन किए जा रहे थे। इसके अलावा, मरीजों को मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं के बदले उनसे अलग से पैसे भी मांगे जा रहे थे। इसी धांधली को रोकने के लिए सरकार ने इन अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
योजना में पारदर्शिता लाने के लिए क्या हुए बदलाव?
- कुल 2,359 अस्पतालों को योजना के पैनल से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
- लगभग 1,200 अस्पतालों को काम में लापरवाही के चलते सस्पेंड किया गया है।
- अस्पतालों पर फर्जीवाड़ा करने के आरोप में 25 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है।
- मरीजों की सुरक्षा के लिए अब अस्पतालों की निगरानी और कड़ी कर दी गई है।
- योजना के तहत अब केवल उन्हीं अस्पतालों को जोड़ा जाएगा जो सभी मानकों को पूरा करेंगे।
सरकार का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को बिना किसी परेशानी के 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देना है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एंटी-फ्रॉड यूनिट्स को और ज्यादा सक्रिय बनाया जाए। अगर कोई अस्पताल मरीज से कैश की मांग करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत शिकायत दर्ज की जा सकती है।
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