Solar Panel News: राजस्थान में पानी की सप्लाई होगी सौर ऊर्जा से, बचेगा करोड़ों का बिजली बिल

Solar Panel News: राजस्थान सरकार पानी की सप्लाई के लिए पंपिंग स्टेशनों पर सोलर प्लांट लगाने जा रही है जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी।

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Solar Panel News: राजस्थान में अब सूरज की रोशनी से पानी की सप्लाई की जाएगी। राज्य सरकार ने पीने के पानी की सप्लाई व्यवस्था को सौर ऊर्जा से जोड़ने की एक बड़ी योजना तैयार की है। जलदाय विभाग अपने बड़े पंपिंग स्टेशनों की छतों पर 200 मेगावाट से ज्यादा क्षमता के सोलर प्लांट लगाने जा रहा है। इस कदम से बिजली बिलों में भारी कमी आने की उम्मीद है।

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इस बड़ी योजना से सरकार को कितना फायदा होगा?

इस योजना के शुरू होने से सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी। हर साल बिजली बिल के रूप में खर्च होने वाले करीब 180 करोड़ रुपये बचाए जा सकेंगे। वर्तमान में इन पंपिंग स्टेशनों को चलाने के लिए सालाना लगभग 350 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है। सोलर पावर आने से ग्रिड की बिजली पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 703 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आने का अनुमान है।

पहले चरण में किन जिलों को चुना गया है?

सरकार इस योजना को पहले चरण में राज्य के आठ जिलों में लागू कर रही है। इन जिलों के पंपिंग स्टेशनों पर कुल 201 सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। जिलेवार विवरण इस प्रकार है:

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  • बारां में सबसे ज्यादा 43 सोलर प्लांट लगाए जाएंगे।
  • भरतपुर में 31 और सवाई माधोपुर में 27 प्लांट स्थापित होंगे।
  • दौसा में 26 और टोंक में 24 पंपिंग स्टेशनों पर यह सिस्टम लगेगा।
  • कोटा में 21, डीग में 16 और बूंदी में 13 प्लांट लगाने की तैयारी है।

बिना सरकारी खर्च के कैसे काम करेगी यह योजना?

इस प्रोजेक्ट को रेस्को मॉडल पर पूरा किया जाएगा। इसके तहत सोलर प्लांट लगाने का पूरा खर्च निजी कंपनियां खुद उठाएंगी। इसके साथ ही अगले 25 साल तक इन प्लांट की देखभाल और संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं कंपनियों की होगी। काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए किसी भी एक कंपनी को 50 मेगावाट से ज्यादा का काम नहीं दिया जाएगा।

बिजली के हिसाब-किताब के लिए क्या है खास तकनीक?

इस योजना में वर्चुअल नेट मीटरिंग यानी वीएनएम तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से एक ही सोलर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली का फायदा अलग-अलग जगहों पर मौजूद कनेक्शनों को मिल सकेगा। ग्रिड में भेजी गई बिजली के आधार पर ही सरकारी बिलों में कटौती की जाएगी। कंपनियों के लिए शर्त रखी गई है कि सोलर प्लांट का सालाना क्षमता उपयोग फैक्टर 17 से 19 प्रतिशत के बीच होना चाहिए। इस चरण की सफलता के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

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