Sikar Elections: सीकर जिले में आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर चुनावी बिसात बिछ चुकी है। जयपुर में जिला प्रमुख, सभापति और नगर पालिका अध्यक्षों के पदों के लिए निकाली गई लॉटरी ने कई दिग्गजों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं, तो कई नए चेहरों के लिए रास्ते खोल दिए हैं। इस बार के चुनावों में खास बात यह है कि जिले की मुख्य सीटों पर ‘आधी आबादी’ यानी महिलाओं का वर्चस्व देखने को मिलेगा। जिला प्रमुख और सीकर नगर परिषद सभापति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर एक बार फिर महिलाओं को नेतृत्व करने का अवसर मिला है। अब सबकी नजरें 17 अगस्त को होने वाली वार्डों की लॉटरी पर टिकी हैं।
सीकर की सत्ता में महिलाओं का दबदबा
लॉटरी के परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि सीकर जिले की ग्रामीण और शहरी सरकार की कमान इस बार भी महिलाओं के पास रहेगी। सीकर जिला परिषद में प्रमुख का पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ है। यह लगातार पांचवां मौका है जब जिला परिषद की मुखिया कोई महिला बनेगी। इसी तरह सीकर नगर परिषद में भी सभापति की कुर्सी सामान्य महिला के हिस्से आई है। यहां भी पांचवीं बार महिला ही बोर्ड की अध्यक्ष चुनी जाएगी। खाटूश्यामजी में भी पालिका अध्यक्ष का पद ओबीसी महिला के लिए सुरक्षित रखा गया है।
किन निकायों में किसे मिला मौका?
- सीकर नगर परिषद: अनारक्षित महिला
- खाटूश्यामजी पालिका: ओबीसी महिला
- नीमकाथाना और फतेहपुर: अनारक्षित
- रामगढ़-शेखावाटी और लक्ष्मणगढ़: अनारक्षित
- लोसल, खंडेला और रींगस पालिका: अनारक्षित
- श्रीमाधोपुर, दांता, पलसाना और अजीतगढ़: ओबीसी
- धोद नगर पालिका: अनुसूचित जाति (एससी)
17 अगस्त को होने वाली लॉटरी में क्या खास होगा?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, 17 अगस्त का दिन जिले की चुनावी राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन वार्ड पार्षदों, प्रधानों और सरपंचों के पदों के लिए लॉटरी निकाली जाएगी। सुबह 11 बजे से जिला परिषद सभागार में वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद दोपहर की पारी में शेष निकायों के लिए पर्चियां निकाली जाएंगी। उपखंड स्तर पर भी सरपंच और वार्ड पंचों के पदों का निर्धारण इसी दिन किया जाएगा, जिसके बाद चुनावी मैदान पूरी तरह सज जाएगा।
क्या हैं राजनीतिक दलों के दावे ?
चुनावों की आहट के साथ ही कांग्रेस और भाजपा ने अपनी जीत के दावे शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गिठाला का कहना है कि पार्टी भाजपा सरकार की नाकामियों को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरेगी। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़ ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, जैसे यमुना जल समझौता और पेपर माफिया पर कार्रवाई को अपनी जीत का आधार बताया है। दोनों ही दल अब आरक्षण के नए समीकरणों के हिसाब से अपनी रणनीतियां तैयार करने में जुट गए हैं।
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