Goenka Sangam 2026: राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर में आने वाली 7 से 11 सितंबर तक एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। श्री शक्ति गोयनका ट्रस्ट, कोलकाता की ओर से आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय उत्सव में भारत सहित अमेरिका, जापान, इंग्लैंड, सिंगापुर और दुबई जैसे देशों से गोयनका समाज के 600 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 10 सितंबर को होने वाला सम्मान समारोह होगा, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित करेंगे। सुने पूरा इंटरव्यू।
इस भव्य आयोजन के पीछे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इमामी ग्रुप के कोर पिलर और श्री शक्ति गोयनका ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सुशील कुमार गोयनका ने 89.6 एफएम सीकर की आरजे नैना माथुर से विशेष बातचीत में इस सम्मान समारोह के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने आयोजन के सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस समागम का उद्देश्य केवल एक औपचारिक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि शेखावाटी क्षेत्र में सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाना है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की प्रगति पर जोर दिया है। उनका मानना है कि शेखावाटी की महिलाओं को घूंघट प्रथा और पारंपरिक बंधनों से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनानी चाहिए। यह मंच केवल एक परिवार तक सीमित न रहकर पूरे शेखावाटी अंचल की बेटियों और महिलाओं के कौशल विकास का जरिया बनेगा।
कौन-कौन सी दिग्गज हस्तियां इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी?
फतेहपुर के इस ऐतिहासिक संगम में व्यापार और कला जगत के कई बड़े नाम शामिल होने वाले हैं। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है:
- जी समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और इमामी ग्रुप के को-चेयरमैन आर.एस. गोयनका की उपस्थिति।
- टैली सॉल्यूशंस के भरत गोयनका और पशुपति ग्रुप के विष्णु गोयनका भी होंगे शामिल।
- गोल्डी मसाले के डायरेक्टर आकाश गोयनका और गोल्डन गोयनका समूह के गिरधारी लाल गोयनका की शिरकत।
- धार्मिक सत्रों में साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती के प्रवचन और कृष्णा विजयवर्गीय का जागरण ओढ़नी उत्सव।
- नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा करेंगे मुख्य समारोह की अध्यक्षता।
नई पीढ़ी को लेकर सुशील गोयनका के क्या विचार हैं?
सुशील गोयनका का कहना है कि अब समय आ गया है जब हमें युवाओं पर अपने विचार थोपने के बजाय उनकी बातों को सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि 450 साल पुरानी कुलदेवी मंदिर की परंपरा को निभाते हुए साल 2019 से समाज की उन प्रतिभाओं को पुरस्कृत करना शुरू किया गया है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था। इस पहल का लक्ष्य एक ऐसा समाज बनाना है जहां माता-पिता की पहचान उनके सफल बच्चों के नाम से हो। इस आयोजन के जरिए विदेशों में रह रही नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों और संस्कृति से भावनात्मक रूप से जुड़ रही है।
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