Rajasthan Urban Polls: राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही आचार संहिता लागू हो चुकी है। आमतौर पर चुनाव आचार संहिता लगते ही विकास कार्य और प्रशासनिक कामकाज रुक जाते हैं। इस बार लोगों की परेशानियों को देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने एक राहत भरा आदेश जारी किया है। विभाग ने साफ किया है कि जनता से जुड़े रोजमर्रा के जरूरी काम और पहले से स्वीकृत विकास कार्य बिना किसी बाधा के चलते रहेंगे।
इन सरकारी कामों पर नहीं पड़ेगा असर?
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर की ओर से नगर निगमों, परिषदों और पालिकाओं के अधिकारियों को निर्देश भेजे गए हैं। इस आदेश के अनुसार, नीचे दिए गए कामों को बिना रुके जारी रखा जाएगा:
- नक्शा पास कराना: राजस्थान नगरपालिका कानून की धारा 194 के तहत मकानों के नए नक्शे, दोबारा निर्माण या संशोधन के आवेदनों का निपटारा तय की गई दो महीने की समय सीमा में ही किया जाएगा।
- पट्टे और नामांतरण: जिन लोगों ने पहले से स्वीकृत योजनाओं में नीलाम हुए भूखंडों की पूरी राशि जमा कर दी है, उन्हें पट्टे जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही पट्टों के रिन्यूअल, री-वैलिडेशन और नामांतरण के काम भी चलते रहेंगे।
- कृषि भूमि नियमन: जरूरी मंजूरी मिलने और तय फीस जमा होने पर कृषि भूमि के नियमन और निर्माण की मंजूरी वाले पट्टे जारी किए जा सकेंगे।
- चल रहे विकास कार्य: जिन विकास कार्यों के वर्क आर्डर आचार संहिता लागू होने से पहले जारी हो चुके हैं या जिन पर काम शुरू हो चुका है, वे काम नहीं रुकेंगे।
- दस्तावेजी काम: नए प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने, मंजूरी लेने, टेंडर पेपर तैयार करने और नक्शे की डिजाइन बनाने जैसे कागजी काम जारी रहेंगे।
- आपातकालीन काम: जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट की मरम्मत जैसे जरूरी काम करवाए जा सकेंगे।
किन कामों पर रहेगी पूरी रोक?
विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आचार संहिता के चलते किसी भी तरह की नई योजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकेगी। इसके साथ ही नए टेंडर जारी करने, नए विकास कार्य शुरू करने और नए वर्क आर्डर देने पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी। जमीन के आवंटन और लोन बांटने से जुड़े नए नीतिगत फैसले भी इस दौरान नहीं लिए जा सकेंगे। चुनाव संपन्न होने तक नगर पालिकाओं की बोर्ड बैठकें आयोजित करने की भी अनुमति नहीं होगी।
चुनाव प्रचार में सरकारी गाड़ियों पर रोक
चुनाव में सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने बेहद कड़े नियम बनाए हैं। आदेश के तहत मेयर, डिप्टी मेयर, अध्यक्ष या सभापति जैसे पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि चुनाव प्रचार के लिए किसी भी सरकारी या निकाय की गाड़ी का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें मिलने वाली अन्य सरकारी सुविधाओं के चुनावी इस्तेमाल पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। इन नियमों का पालन न करने पर इसे सीधे तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
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