Krishna Janmashtami 2026: आज जन्माष्टमी, 5253वें जन्मोत्सव पर देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

Krishna Janmashtami 2026: साल 2026 में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव किस दिन मनाया जाएगा? जानिए कृष्ण जन्माष्टमी की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत की आसान विधि के बारे में विस्तार से।

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Rajasthan Desk - News
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Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। आज 4 सितंबर को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस मौके पर मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का इंतजार करेंगे।

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आज मनेगा भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव

साल 2026 में भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 3 सितंबर 2026 को रात के समय होगी। वहीं इस तिथि का समापन 4 सितंबर 2026 को होगा। उदय तिथि के नियम के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और उत्सव 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन गृहस्थ जीवन वाले लोग और वैष्णव संप्रदाय के लोग बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाएंगे।

पूजा के लिए सबसे उत्तम समय कौन सा रहेगा?

जन्माष्टमी के दिन रात के समय कान्हा के जन्म की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। साल 2026 में पूजा का सबसे शुभ समय यानी निशीथ काल मुहूर्त रात के समय रहेगा।

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  • अष्टमी तिथि का प्रारंभ 3 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 20 मिनट पर होगा।
  • अष्टमी तिथि की समाप्ति 4 सितंबर 2026 को रात 09 बजकर 30 मिनट पर होगी।
  • निशीथ काल पूजा का शुभ समय 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
  • इस साल व्रत पारण का समय 5 सितंबर 2026 को सुबह 06 बजकर 05 मिनट के बाद होगा।

बाल गोपाल की पूजा करने की सही विधि क्या है?

जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर व्रत रखने के बाद रात को शुभ मुहूर्त में कान्हा का पूजन करें। भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और नए सुंदर वस्त्र पहनाएं। इसके बाद उन्हें माखन, मिश्री और धनिया की पंजीरी का भोग लगाएं। अंत में आरती करके प्रसाद सभी में बांट दें।

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