Grihalakshmi Mrs India 2026: क्या सोशल मीडिया की नकली दुनिया छीन रही है आपका सुकून? डॉ चांदनी ने खोले राज

Grihalakshmi Mrs India 2026: डॉ चांदनी तुगनैत ने बताया कि कैसे सोशल मीडिया का दबाव मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है और महिलाएं इससे कैसे निपट सकती हैं।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Grihalakshmi Mrs India 2026: आज के दौर में हम भीड़ के बीच होकर भी खुद को तन्हा महसूस करने लगे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है सोशल मीडिया पर एक नकली इमेज बनाए रखने का भारी दबाव। गृहलक्ष्मी मिसेज इंडिया 2026 के भव्य मंच पर पहुंची मशहूर साइकोथेरेपिस्ट डॉ चांदनी तुगनैत ने साफ किया कि जब हम अपनी पसंद से ज्यादा दूसरों के लाइक्स को अहमियत देने लगते हैं, तो हमारा खुद से रिश्ता टूटने लगता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई महिला ऐसा पहनावा चुनती है जिसमें वह सहज नहीं है, सिर्फ इसलिए कि वह फोटो में अच्छी दिखेगी, तो वह अनजाने में अपने मानसिक सुकून से समझौता कर रही है। दिखावे की यह होड़ और दूसरों से अपनी तुलना करना हमें अपनी ही खूबियों से दूर ले जाता है, जिससे उबरना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

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क्या भावनाओं को दबाना सेहत के लिए खतरनाक है?

डॉ चांदनी तुगनैत ने गेटवे ऑफ हीलिंग की फाउंडर के तौर पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अक्सर लोग तनाव को बहुत सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। समाज में आज भी यह मिथ फैला है कि मानसिक परेशानी को स्वीकार करना कमजोरी है, जबकि हकीकत में यह बुखार या चोट की तरह ही है जिसके लिए डॉक्टर की सलाह लेना बिल्कुल सामान्य होना चाहिए। जब हम अपनी भावनाओं को प्रोसेस करने के बजाय उन्हें सोशल मीडिया या वीडियो देखने में व्यस्त होकर दबा देते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे रिश्तों, काम करने की क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने सलाह दी कि अगर आप किसी प्रोफेशनल से बात नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने मन की बातों को कागज पर लिखना यानी ब्रेन डंपिंग करना शुरू करें, इससे मन का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।

मिलेनियल्स और जेन जी की सोच में कितना बड़ा अंतर है?

इस खास बातचीत के दौरान यह बात भी निकलकर आई कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पीढ़ियों की सोच बदल रही है। जहां जेन जी यानी आज की युवा पीढ़ी अपनी समस्याओं को लेकर काफी खुली हुई और जागरूक है, वहीं मिलेनियल्स अब भी इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें मदद की जरूरत है भी या नहीं। डॉ चांदनी ने कहा कि आत्मविश्वास कोई जन्मजात गुण नहीं है, बल्कि यह समय और अनुभवों के साथ विकसित होता है। बचपन में अगर किसी के साथ बुरा बर्ताव हुआ हो या स्कूल में बुलिंग का सामना करना पड़ा हो, तो उसकी मानसिक मजबूती कमजोर हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को विशेष रूप से अपनी क्षमताओं को पहचानने और दूसरों से तुलना बंद करने की जरूरत है ताकि वे अपनी जीवन यात्रा का सही आनंद ले सकें।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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