Bhagwat Katha in Sikar: राजस्थान के सीकर शहर में एक बड़ा धार्मिक उत्सव होने जा रहा है। यहां सालासर रोड पर स्थित एक मैरिज गार्डन में पहली बार अंतरराष्ट्रीय कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का अमृत बरसेगा। यह भव्य आयोजन 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चलेगा। इस धार्मिक कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए सीकर के करीब 300 से अधिक सामाजिक और धार्मिक संगठन एक साथ मिलकर जुटे हैं। इस महापर्व में शेखावाटी के कई प्रसिद्ध साधु-संतों के साथ अग्र पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज भी शामिल होंगे। ।
आयोजन को लेकर तैयारियां तेज
कथा के भव्य आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन समिति के अनुसार, कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। कार्यक्रम की शुरुआत 1 अक्टूबर को एक भव्य कलश यात्रा के साथ की जाएगी। यह यात्रा छोटा तालाब के पास स्थित खाकीजी मंदिर से शुरू होकर दयालदास महाराज के सान्निध्य में कथा स्थल तक पहुंचेगी। हर दिन कथा में विभिन्न प्रसंगों के अनुसार सजीव झांकियां और विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
भक्तों की सुविधा के लिए क्या विशेष इंतजाम किए गए हैं
कथा स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। आयोजन समिति ने भक्तों के बैठने और आने-जाने के लिए व्यापक व्यवस्था की है:
- कथा स्थल पर एक विशाल वाटरप्रूफ टेंट लगाया गया है, जिसमें लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की क्षमता है।
- महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के बैठने के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनाए गए हैं।
- बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को पंडाल तक लाने-ले जाने के लिए ई-रिक्शा की निशुल्क सुविधा रहेगी।
- सीकर शहर के साथ-साथ पास के गांवों से आने वाले भक्तों के लिए गाड़ियों का विशेष प्रबंध किया गया है।
सात दिन में भगवान की लीलाओं का वर्णन
सात दिवसीय इस ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन भगवान के अलग-अलग रूपों और लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। कथाव्यास इंद्रेश उपाध्याय द्वारा सुनाए जाने वाले मुख्य प्रसंग इस प्रकार हैं:
- पहले दिन भागवत महात्म्य का सुंदर वर्णन किया जाएगा।
- दूसरे दिन कपिल चरित्र, अजमल चरित्र, ध्रुव चरित्र और जड़भरत की कथा होगी।
- तीसरे दिन प्रहलाद चरित्र और वामन अवतार की कथा सुनाई जाएगी।
- चौथे दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव यानी नंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
- पांचवें दिन गोवर्धन लीला महोत्सव का आयोजन होगा।
- छठे दिन भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का उत्सव मनेगा।
- सातवें और अंतिम दिन सुदामा चरित्र और शुकदेव पूजन की सुंदर झांकियां सजाई जाएंगी।
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