Pawan Singh Jyoti Singh Case: भोजपुरी जगत के पावर स्टार कहे जाने वाले पवन सिंह एक बार फिर कानूनी पचड़ों में फंस गए हैं और इस बार उन्हें अपनी गैरमौजूदगी के लिए जेब ढीली करनी पड़ी है। बलिया के फैमिली कोर्ट में चल रहे गुजारा भत्ता के मामले में जज ने अभिनेता की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। इतना ही नहीं, उनकी पत्नी ज्योति सिंह भी इस दंड से बच नहीं पाईं और साक्ष्य से जुड़े एक तकनीकी कारण से उन पर भी 500 रुपये का हर्जाना लगाया गया है। 22 अप्रैल 2022 से शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां दोनों पक्षों को बार-बार अदालत के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन पवन सिंह का बार-बार न आना अब चर्चा का विषय बन गया है।
आखिर क्यों पवन सिंह को छोड़नी पड़ी कोर्ट की सुनवाई?
पवन सिंह के वकील हरिवंश सिंह ने अदालत के सामने अपनी दलील पेश करते हुए बताया कि अभिनेता किसी लापरवाही की वजह से नहीं, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के कारण पेश नहीं हो सके। असल में पवन सिंह की मां प्रतिमा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और उन्हें हार्ट अटैक आने के बाद 2 अक्टूबर को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुनवाई वाले दिन ही उनकी मां का एक बड़ा ऑपरेशन होना तय हुआ था, जिसके चलते पवन सिंह के लिए बलिया कोर्ट पहुंचना नामुमकिन हो गया। हालांकि ज्योति सिंह अपने वकीलों के साथ समय पर अदालत में मौजूद रहीं, लेकिन साक्ष्य से जुड़ी एक कमी के कारण उन पर भी कोर्ट ने जुर्माना लगा दिया। अब इस पूरे ड्रामे की अगली तारीख 17 अक्टूबर तय की गई है।
क्या टूटता जा रहा है ज्योति सिंह के सब्र का बांध?
कोर्ट परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए ज्योति सिंह का दर्द छलक पड़ा और उन्होंने पवन सिंह के रवैये पर सवाल उठाए। ज्योति ने बेहद भावुक होकर कहा कि वह हर तारीख पर इतनी दूर से बलिया आती हैं, लेकिन पवन सिंह बार-बार कोर्ट की कार्यवाही से नदारद रहते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें अब सिर्फ अदालत और न्याय प्रक्रिया पर ही भरोसा बचा है। यह पहली बार नहीं है जब पवन सिंह पर जुर्माना लगा हो, इससे पहले 9 सितंबर को भी उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। 6 मार्च 2018 को बड़े धूमधाम से हुई इस शादी में दरार आने के बाद से ही दोनों के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और बलिया निवासी रामबाबू सिंह की बेटी ज्योति अब अपने हक की लड़ाई अकेले लड़ रही हैं।
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