HanuMan Ansh Release:
उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसे नीम करोली बाबा के पवित्र कैंची धाम की शांति अब खतरों के घेरे में है और इसका सबसे बड़ा कारण हालिया रिलीज हुई फिल्म और सोशल मीडिया का बढ़ता क्रेज माना जा रहा है। स्थानीय इनफ्लुएंसर ऐश्वर्या कांडपाल ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि फिल्म हनुमान अंश की रिलीज के बाद से इस धार्मिक स्थल पर पर्यटकों का हुजूम इस कदर उमड़ा है कि वहां का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। ऐश्वर्या ने आधी रात को पोस्ट लिखकर अपना गुस्सा जाहिर किया और बताया कि कैसे मीडिया की चकाचौंध ने एक शांत साधना केंद्र को शोर शराबे वाले पर्यटन स्थल में तब्दील कर दिया है। साल 2010 के दशक के अंत तक जहां इस आश्रम में दिन भर में बमुश्किल 50 लोग नजर आते थे, वहीं 2020 के बाद और अब नई फिल्म के आने से यहां तिल रखने की भी जगह नहीं बची है।
क्या रील बनाने के चक्कर में खो रही है आश्रम की मर्यादा?
आश्रम के भीतर के हालात बयां करते हुए ऐश्वर्या ने बताया कि लोग अब श्रद्धा से ज्यादा व्लॉगिंग और दिखावे पर ध्यान दे रहे हैं। महाराज जी और सिद्धि माँ के सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आश्रम में हमेशा से सादगी, चुप्पी और फोटोग्राफी पर पाबंदी रही है, लेकिन अब लोग खुलेआम फोन निकालकर वीडियो बना रहे हैं और माइक पर चिल्लाकर व्लॉगिंग कर रहे हैं। भारी भीड़ के कारण सड़कों पर घंटों का जाम लग रहा है जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। ऐश्वर्या के पिता जो 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और आश्रम की सेवा में जुटे रहते हैं, उन्हें गाड़ियों के लगातार बजते हॉर्न के कारण माइग्रेन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं बल्कि पूरे पहाड़ी ईकोसिस्टम के लिए एक चेतावनी है।
कचरे के ढेर और वन्यजीवों की बढ़ती बेचैनी का जिम्मेदार कौन?
बढ़ते पर्यटन ने न केवल शांति भंग की है बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कों के किनारे और जंगलों के बीच अब प्लास्टिक की बोतलें, सिगरेट के टुकड़े और खाने के रैपरों का अंबार लगा हुआ है। ऐश्वर्या ने दुख जताते हुए कहा कि जिस जगह पर कभी पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती थी, वहां अब गाड़ियों के शोर और भीड़ की वजह से जानवर भी असहज महसूस करने लगे हैं। नई-नई दुकानें खुलने और व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से कैंची धाम की वह मूल पहचान खोती जा रही है जिसके लिए दुनिया भर से लोग यहां आते थे। आश्रम के प्रबंधन से जुड़े लोग भी इस भीड़ को नियंत्रित करने में खुद को असहाय पा रहे हैं क्योंकि श्रद्धा के नाम पर आने वाले लोग नियमों की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
कैसे बच पाएगी देवभूमि की यह अनमोल विरासत?
ऐश्वर्या कांडपाल ने स्पष्ट किया कि वह किसी को भगवान के दर्शन करने से नहीं रोक रही हैं, लेकिन उन्होंने आने वाले पर्यटकों से एक विनम्र अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग जब भी यहां आएं तो अपने फोन को साइलेंट मोड पर रखें और उसे बैग के अंदर ही रहने दें। अलग-अलग गाड़ियां लाने के बजाय ग्रुप में आने की कोशिश करें ताकि ट्रैफिक कम हो और हॉर्न का कम से कम इस्तेमाल करें। सबसे जरूरी बात यह है कि अपना कचरा वापस अपने साथ ले जाएं और आश्रम की उस सादगी का सम्मान करें जिसके लिए महाराज जी जाने जाते थे। फिल्म और सोशल मीडिया की वजह से मिली इस लोकप्रियता का फायदा तभी है जब हम अपनी पवित्र जगहों की पवित्रता को बरकरार रख सकें, वरना यह आधुनिकता की भेंट चढ़कर केवल एक पिकनिक स्पॉट बनकर रह जाएगा।
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