Meena Kumari Pakiza Movie: लंदन में दिखा साहिब जान का जादू, 54 साल बाद पाकीजा के सारे टिकट हुए फुल

Meena Kumari Pakiza Movie: लंदन में पाकीजा की स्पेशल स्क्रीनिंग के सभी टिकट एडवांस में बिके। जानें मीना कुमारी और कमाल अमरोही की इस क्लासिक फिल्म से जुड़ी अनसुनी यादें।

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Rupali kumawat - Sub Editor
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Meena Kumari Pakiza Movie: लंदन के बीएफआई आईमैक्स थिएटर में उस वक्त हर कोई दंग रह गया, जब 54 साल पुरानी एक भारतीय फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए एक महीना पहले ही सारे टिकट बिक गए। यह कोई आज की ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं, बल्कि ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी की कालजयी फिल्म पाकीजा थी। 4 फरवरी 1972 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली इस फिल्म का क्रेज आज भी सात समंदर पार वैसा ही बना हुआ है जैसा दशकों पहले था। फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने अमरोही परिवार के साथ मिलकर इस मास्टरपीस को सहेजने का काम किया है, जिसके नए वर्जन का वर्ल्ड प्रीमियर फ्रांस में होने के बाद अब लंदन फिल्म फेस्टिवल में इसकी जबरदस्त दीवानगी देखने को मिली है।

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क्या सच में मीना कुमारी के आंसुओं का आईना थी यह फिल्म?

सिनेमा के गलियारों में अक्सर यह चर्चा होती है कि पाकीजा में साहिब जान का किरदार निभाते हुए मीना कुमारी ने अभिनय नहीं किया, बल्कि अपना दर्द पर्दे पर उतार दिया था। फिल्म के मशहूर गाने चलते चलते यूँ ही कोई मिल गया था की शूटिंग के दौरान मीना कुमारी के फूट-फूटकर रोने के किस्से आज भी मशहूर हैं। कहा जाता है कि उनके निजी जीवन के दुखों ने इस फिल्म के दृश्यों को और भी गहरा बना दिया था। राजकुमार और अशोक कुमार जैसे दिग्गजों से सजी यह फिल्म उस वक्त रिलीज हुई थी जब मीना कुमारी गंभीर रूप से बीमार थीं। विडंबना देखिए कि फिल्म के रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद 31 मार्च 1972 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, जिससे यह फिल्म उनकी आखिरी और सबसे बड़ी वसीयत बन गई।

कमाल अमरोही ने क्यों बनाया था इसे अपनी मोहब्बत का ताजमहल?

इस फिल्म के पीछे की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। निर्देशक कमाल अमरोही ने पाकीजा को अपनी पत्नी मीना कुमारी के प्रति अपने बेपनाह प्यार को जाहिर करने के लिए बनाया था। लेखक विनोद मेहता ने अपनी किताब मीना कुमारी: द क्लासिक बायोग्राफी में इस फिल्म की तुलना शाहजहाँ के बनवाए ताजमहल से की है। हालांकि निर्माण के दौरान कमाल और मीना के बीच काफी मनमुटाव हुए और वे अलग भी हुए, लेकिन कला के प्रति उनके जुनून ने इस फिल्म को रुकने नहीं दिया। आज जब लंदन जैसे शहर में नई पीढ़ी इस क्लासिक फिल्म को देखने के लिए कतारों में खड़ी होती है, तो साबित हो जाता है कि कमाल अमरोही का वह कलात्मक जुनून और मीना कुमारी की आंखों की कशिश आज भी उतनी ही ताजा है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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