What Is Dyslexia: लाल किले की प्राचीर से गूंजी डिस्लेक्सिया की आवाज, डॉ राघवपत सिंघानिया ने दी खास फिल्म की सौगात

What Is Dyslexia: लाल किले में हुई फिल्म ‘What Is Dyslexia?’ की विशेष स्क्रीनिंग, डॉ राघवपत सिंघानिया और केट ग्रिग्स ने डिस्लेक्सिया के प्रति समाज को जागरूक करने की बड़ी पहल की।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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What Is Dyslexia:

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देश की ऐतिहासिक धरोहर लाल किले की दीवारों ने एक ऐसी कहानी की गवाह बनी जो समाज की सोच बदलने का दम रखती है। डिस्लेक्सिया जागरूकता माह के शानदार समापन पर जेकेसी फाउंडेशन की पहल ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक ने ऑर्किड्स फाउंडेशन के साथ मिलकर एक बड़ा कदम उठाया। यहां शॉर्ट फिल्म ‘What Is Dyslexia?’ की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिसे हम कमजोरी समझते हैं, वह असल में एक विशेष मानसिक खूबी हो सकती है। इस फिल्म को मेड बाय डिस्लेक्सिया संस्था ने तैयार किया है, जिसे दुनिया भर के सफल लोग चलाते हैं जो खुद इस स्थिति से गुजर चुके हैं। लाल किले के भव्य साउंड एंड लाइट शो के दौरान हुई इस स्क्रीनिंग ने इतिहास और आधुनिक सामाजिक सोच का एक अनोखा संगम पेश किया।

क्या यह केवल सीखने की चुनौती है या सोचने का अलग अंदाज?

इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य डिस्लेक्सिया को एक बीमारी या चुनौती के बजाय एक अनोखी क्षमता के रूप में पेश करना है। स्क्रीनिंग के दौरान जेके सीमेंट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक के संस्थापक डॉ राघवपत सिंघानिया के साथ श्रीमती सोनम सिंघानिया और ऑर्किड्स फाउंडेशन की डॉ गीत ओबेरॉय जैसे दिग्गज मौजूद रहे। डॉ राघवपत सिंघानिया ने स्पष्ट किया कि एक समावेशी समाज तभी बन सकता है जब हम अलग तरह से सोचने और सीखने वाले लोगों को सम्मान दें। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं बल्कि यह बताने का जरिया है कि डिस्लेक्सिया से जूझ रहे लोग असल में अलग तरीके से सोचते हैं। लाल किले जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर इस विषय को लाना लाखों लोगों तक संदेश पहुंचाने की एक कोशिश है ताकि हर बच्चा अपनी विशिष्ट क्षमताओं को पहचान सके।

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ऐतिहासिक मंच से बदलाव की एक नई शुरुआत?

लाल किला हमेशा से ही राष्ट्रीय विचारों की अभिव्यक्ति का केंद्र रहा है और इस बार यहां से समावेशिता का संदेश दिया गया। फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर केट ग्रिग्स ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत के इस ऐतिहासिक स्मारक पर फिल्म का हिंदी और अंग्रेजी में प्रदर्शन होना एक बड़ी उपलब्धि है। उनका मानना है कि हर बच्चे को अपनी खूबियां पहचानने का मौका मिलना चाहिए। डालमिया भारत और सभ्यता फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद और अभिभावक शामिल हुए। इस पहल ने यह साबित कर दिया कि अगर सामूहिक प्रयास किए जाएं, तो डिस्लेक्सिया से जुड़े व्यक्तियों के लिए एक बेहतर और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार किया जा सकता है। यह स्क्रीनिंग पारंपरिक जागरूकता अभियानों से हटकर एक नई दिशा दिखाने वाली साबित हुई है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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