Crude oil Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को जोरदार कमी देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बीच ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम 5 प्रतिशत से भी ज्यादा टूट गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू होने की खबरों ने बाजार को बड़ी राहत दी है। इससे पहले ऊर्जा आपूर्ति ठप होने का जो डर बना हुआ था, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। शुरुआती कारोबार में कीमते 90 डॉलर प्रति बैरल के भी नीचे चली गई थीं, जो फिलहाल 92 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।
कच्चे तेल के भाव अचानक क्यों लुढ़के?
दुनिया भर में तेल की कीमतों में आई इस कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बदलते रिश्ते हैं। पिछले कई दिनों से जारी हमलो के बाद अब वाशिंगटन ने अपने कदम पीछे खीचे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने के पक्ष में हैं। कतर और ओमान इस शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इस कूटनीतिक पहल से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
बाजार के ताजा आंकड़े क्या कहते हैं?
- ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 4.89 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 91.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
- वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड भी करीब 5.5 प्रतिशत गिरकर 84.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
- पिछले हफ्ते गुरुवार को तनाव के चरम पर होने के कारण कीमतें 100.69 डॉलर के पार चली गई थीं।
- यूरोप में नैचुरल गैस की कीमतों में भी नरमी देखी गई है।
क्या आम जनता को पेट्रोल और डीजल पर मिलेगी राहत?
कच्चे तेल में आई इस गिरावट का सीधा असर भारत में ईधन की कीमतों पर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स और रेटिंग एजेंसी इकरा का मानना है कि अगर कच्चे तेल के भाव 90 से 92 डॉलर के स्तर पर टिके रहते हैं, तो भारतीय तेल कंपनियां आम लोगों को राहत दे सकती हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक कम किए जा सकते हैं। ईरान द्वारा अपनी जवाबी कार्रवाई रोकने के फैसले ने भी बाजार को स्थिरता दी है।
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