Hydrogen Train: ‘मेड इन इंडिया, धुएं की जगह निकलेगा पानी’, रेल मंत्री ने बताई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की 8 खूबियां

Hydrogen Train: प्रधानमंत्री मोदी ने जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन किया। जानिए इस प्रदूषण मुक्त तकनीक की पूरी खासियत।

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Rajasthan Desk - News
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Hydrogen Train: भारतीय रेल के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होने वाली ट्रेन का लोकार्पण किया है। हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होगी। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी हाइड्रोजन तकनीक है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जींद में हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग सेंटर की सुविधाओं का मुआयना किया और इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया।

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जींद से सोनीपत के बीच ही क्यों शुरू हुई यह ट्रेन?

सरकार ने हरित परिवहन की दिशा में जींद-सोनीपत रूट को इसके पहले चरण के लिए चुना है। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह धुएं के बजाय केवल पानी का उत्सर्जन करती है। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है जिसे भारतीय इंजीनियरों ने कड़ी मेहनत से तैयार किया है। रेल मंत्री ने बताया कि 2400 किलोवॉट के हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम के साथ यह तकनीक अब भारत की अपनी संपत्ति है। आने वाले समय में इस सफलता से भारत की विदेशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।

क्या है इस स्वदेशी तकनीक की असली ताकत?

यह ट्रेन आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करती है। इसमें लगी हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक बिजली पैदा करती है, जिससे ट्रेन की मोटर को ऊर्जा मिलती है। सुरक्षा के लिहाज से भी इसे दुनिया की बेहतरीन एजेंसियों से प्रमाणित कराया गया है।

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  • यह पूरी तरह ईको-फ्रेंडली ट्रेन है जिससे जहरीली गैसें नहीं निकलतीं।
  • हाइड्रोजन सेल से बनने वाली बिजली ही ट्रेन के पहियों को रफ्तार देती है।
  • प्रदूषण के नाम पर यह ट्रेन केवल पानी की बूंदें ही बाहर छोड़ती है।
  • भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित इस तकनीक के पेटेंट अधिकार अब भारत के पास हैं।
  • जींद में इस विशेष ट्रेन के लिए अलग से हाइड्रोजन प्लांट भी लगाया गया है।
  • भविष्य में इसी तकनीक का उपयोग बड़े समुद्री जहाजों और ट्रकों में भी किया जाएगा।
  • यह तकनीक मछली पकड़ने वाली नावों के लिए भी वरदान साबित हो सकती है।

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