Indian Army : करगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक कितनी ताकतवर हुई भारतीय सेना, जानिए नई जंग के तरीके

Indian Army Transformation: करगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय सेना की नई युद्ध रणनीति और आधुनिक हथियारों के बारे में विस्तार से जानें।

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Rajasthan Desk - News
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Indian Army : भारतीय सेना ने पिछले 27 वर्षों में अपनी युद्धक क्षमता और रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। देश आज करगिल विजय की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है, लेकिन 1999 के उस रक्षात्मक युद्ध से लेकर हाल के ऑपरेशन सिंदूर तक, सेना का अंदाज अब पूरी तरह बदल चुका है। जहां करगिल एक रक्षात्मक लड़ाई थी, वहीं ऑपरेशन सिंदूर सेना के आक्रामक और आधुनिक स्वरूप को दर्शाता है। जानकारों का मानना है कि अब युद्ध केवल आमने-सामने की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसमें तकनीक और चतुराई का महत्व सबसे अधिक हो गया है।

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करगिल और ऑपरेशन सिंदूर के बीच क्या है बुनियादी अंतर?

करगिल युद्ध को सेना की चौथी पीढ़ी (फोर्थ जनरेशन) की लड़ाई माना जाता है, जिसमें भारी हथियारों और पूरी ताकत का इस्तेमाल हुआ था। इसके उलट ऑपरेशन सिंदूर को 4.5 जनरेशन की जंग कहा जा रहा है। इसमें दुश्मन को घर में घुसकर मारने के लिए उच्च स्तर की तकनीक और सटीक रणनीति का प्रयोग किया गया। अब भारतीय सेना अपनी हर इकाई को और भी अधिक घातक बना रही है।

  • भैरव बटालियन: यह एक विशेष लाइट कॉम्बेट बटालियन है जिसमें आर्टिलरी, एयर डिफेंस और सिग्नल के सैनिक एक साथ मिलकर काम करते हैं।
  • शक्तिबाण रेजिमेंट: पारंपारिक तोपों की जगह अब इस रेजिमेंट में ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और हवा में घातक हमला करने वाले हथियारों को शामिल किया गया है।
  • बाज बटालियन: बड़े और ऊंचे आसमान में उड़ने वाले ड्रोन्स को संचालित करने के लिए यह एक नया स्पेशलाइज्ड कैडर बनाया गया है।
  • रुद्र ब्रिगेड: सेना में सात ऐसी ब्रिगेड बनाई जा रही हैं जिनमें पैदल सेना के साथ-साथ जरूरत के हिसाब से टैंक और अन्य हथियार भी मौजूद रहेंगे।
  • अश्नि प्लाटून: अब सेना की हर पैदल बटालियन के पास अपनी खुद की ड्रोन प्लाटून है, जिसे अश्नि नाम दिया गया है।

सेना की ताकत और रफ्तार में होगा इजाफा

सेना अब इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) पर ध्यान दे रही है। ये ग्रुप ब्रिगेड से बड़े और डिवीजन से छोटे होते हैं। इनकी खास बात यह है कि इनमें टैंक, पैदल सैनिक, आर्टिलरी गन और हेलीकॉप्टर सब एक ही कमान के नीचे काम करते हैं। इससे युद्ध के समय फैसला लेने और हमला करने की गति कई गुना बढ़ जाती है। आधुनिक तकनीक के समावेश से भारतीय सेना अब किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

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