Kerala Assembly Elections Result 2026: केरल की सत्ता में कांग्रेस की जोरदार वापसी, जानिए यूडीएफ की जीत के बड़े कारण

Kerala Assembly Elections Result 2026: केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बहुमत का आंकड़ा पार किया है, जानें जीत के प्रमुख कारण और सियासत का नया समीकरण।

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Kerala Assembly Elections Result 2026: केरल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के रुझानों में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ गठबंधन ने बहुमत की रेखा को पार कर लिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार यूडीएफ 94 सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए है, जबकि वामपंथी दलों का एलडीएफ गठबंधन महज 42 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। कांग्रेस की इस कामयाबी के पीछे सटीक रणनीति और जनता के बीच बदलाव की लहर को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

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एलडीएफ की हार और कांग्रेस की बढ़त के पीछे क्या है गणित?

केरल में पिछले दो बार से पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी। राज्य के राजनीतिक इतिहास को देखें तो यहां की जनता आमतौर पर किसी भी पार्टी को लगातार तीसरी बार मौका नहीं देती है। इस बार भी मतदाताओं ने बदलाव के लिए वोट दिया, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस और उसके सहयोगियों को मिला। सत्ता विरोधी लहर ने यूडीएफ के लिए जीत की ठोस जमीन तैयार करने का काम किया है।

  • यूडीएफ गठबंधन 94 सीटों के साथ जीत की ओर बढ़ रहा है।
  • पिनाराई विजयन की एलडीएफ केवल 42 सीटों पर आगे है।
  • यूडीएफ के वोट शेयर में लगभग 6 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया है।
  • कांग्रेस गठबंधन का कुल वोट शेयर अब बढ़कर 44 फीसदी तक पहुंच गया है।

राहुल और प्रियंका गांधी की मेहनत ने कैसे पलटी बाजी?

इस चुनाव में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रियता ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया। वायनाड से जुड़ाव के कारण राहुल गांधी की बातों का स्थानीय लोगों पर गहरा असर पड़ा। वहीं प्रियंका गांधी ने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाकर युवाओं और महिलाओं को पार्टी से जोड़ने में सफलता हासिल की। कांग्रेस ने इस बार अपनी पुरानी गलतियों को सुधारते हुए उम्मीदवारों के चयन में गुटबाजी को दरकिनार किया, जिससे पार्टी को एकजुट होकर लड़ने में मदद मिली।

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मुस्लिम लीग और अल्पसंख्यक वोटों का क्या रहा असर?

केरल के चुनाव परिणामों में अल्पसंख्यकों की एकजुटता ने निर्णायक भूमिका निभाई है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ कांग्रेस का तालमेल काफी असरदार रहा, जिससे वोट बैंक का बड़ा हिस्सा यूडीएफ की झोली में आ गिरा। इसके अलावा सत्ताधारी गठबंधन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी जनता के भरोसे को कम किया। कांग्रेस ने इन घोटालों को अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाया और खुद को एक बेहतर विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश किया।

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