Planet Labs: अमेरिकी सरकार के दबाव में सैटेलाइट कंपनी ने ईरान जंग की तस्वीरों पर लगाई पाबंदी

Planet Labs: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की सैटेलाइट तस्वीरों पर प्लेनेट लैब्स ने रोक लगा दी है। जानिए आखिर क्यों ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला लिया।

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Rajasthan Desk - News
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Planet Labs: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग की असल हकीकत अब दुनिया के सामने आसानी से नहीं आ पाएगी। सैटेलाइट से धरती की तस्वीरें खींचने वाली मशहूर कंपनी प्लेनेट लैब्स ने एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि वह ईरान और पश्चिम एशिया के युद्ध ग्रस्त इलाकों की फोटो जारी करने पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा रही है। यह कदम अमेरिकी प्रशासन की ओर से की गई खास अपील के बाद उठाया गया है। पहले यह पाबंदी मात्र दो हफ्तों के लिए थी, लेकिन अब इसे तब तक के लिए बढ़ा दिया गया है जब तक युद्ध थम नहीं जाता।

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आखिर क्यों छिपाई जा रही हैं जंग के मैदान की तस्वीरें?

कैलिफोर्निया की इस कंपनी ने अपने ग्राहकों को ईमेल भेजकर इस फैसले की जानकारी दी है। प्रशासन का मानना है कि अगर युद्ध की ताजा तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, तो दुश्मन देश इनका फायदा उठाकर अमेरिका और उसके साथियों पर सटीक हमले कर सकते हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 9 मार्च से पहले की कोई भी फोटो फिलहाल नहीं दिखाई जाएगी।

क्या अमेरिका को भारी नुकसान होने का डर है?

दबाव की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि ईरान के हमलों में अमेरिका को काफी नुकसान हुआ है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन नहीं चाहता कि तबाही के सबूत पूरी दुनिया के सामने आएं। इस पूरे विवाद से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

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  • इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे।
  • ईरान की मिसाइलों ने जवाब में सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
  • सऊदी और कतर में बने सैन्य बेस को ईरान के हमलों से काफी क्षति पहुंचने की खबरें हैं।
  • सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दुश्मन देश हथियारों को गाइड करने और मिसाइल ट्रैक करने का काम कर सकते हैं।
  • रिपोर्टर और सैन्य विशेषज्ञ इन तस्वीरों की कमी के कारण अब जमीनी हालात का सही अंदाजा नहीं लगा पाएंगे।

क्या है प्लेनेट लैब्स और यह कैसे काम करती है?

यह दुनिया की सबसे बड़ी सैटेलाइट कंपनियों में से एक है, जिसके पास लगभग 200 उपग्रहों का बेड़ा है। यह कंपनी मीडिया, सरकारों और निजी संस्थाओं को आपदा और युद्ध के समय की तस्वीरें बेचती है। भारत में भी यह कंपनी खेती और जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े कार्यों में सरकार की मदद करती है। इस पाबंदी पर पेंटागन ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

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