Latest Update: केंद्र सरकार ने नीट परीक्षा को लेकर उपजे विवादों के बीच शिक्षा मंत्रालय की कमान बदल दी है। धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त जिम्मा सौंपा है। नई जिम्मेदारी मिलते ही जोशी ने कहा कि वह पूरी कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के साथ इस काम को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इस क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
नीट विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा फैसला
नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के चलते धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें विचलित किया है। प्रधान ने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह मामला निजी प्रतिष्ठा से बढ़कर छात्रों के भविष्य का है। उन्होंने सीबीआई जांच और परीक्षा सुधारों के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी और क्या है उनका राजनीतिक सफर?
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के एक अनुभवी नेता हैं और कर्नाटक की राजनीति में उनका बड़ा कद है। उनके अनुभव को देखते हुए ही सरकार ने उन्हें यह महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार दिया है।
- प्रह्लाद जोशी कर्नाटक की धारवाड़ संसदीय सीट से वर्ष 2004 से लगातार लोकसभा सांसद हैं।
- उनका जन्म 1962 में कर्नाटक में हुआ था और वे लंबे समय तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी रहे हैं।
- वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य विभाग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं।
- इससे पहले वे कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
- जोशी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले सालों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने का बेहतरीन काम किया है।
नीट परीक्षा में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए?
परीक्षा में धांधली की शिकायतों के बाद सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल के अंतिम समय में इन सुधारों की रूपरेखा तैयार की थी।
- 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा में गड़बड़ी पाए जाने पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
- छात्रों के हितों को देखते हुए पुरानी परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
- भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए अगले साल से परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीडी) मोड में कराने का निर्णय लिया गया है।
- हाल ही में 21 जून को जिला प्रशासनों के सहयोग से 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा फिर से आयोजित की गई।
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