Makar Sankranti 2026: आज 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही उत्तरायण का शुभ आरंभ माना जाता है, जिसे भारतीय परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस अवसर पर लोग प्रातः स्नान कर दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं। मकर संक्रांति को कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व और पोंगल के रूप में भी मनाया जाता है। आज के दिन खिचड़ी का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है, वहीं चारों ओर धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का वातावरण देखने को मिल रहा है।
सूर्य के उत्तरायण से बढ़ा उत्साह
हर साल मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने से धार्मिक और सामाजिक उत्सव का माहौल बनता है। इस वर्ष, 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 03.13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसी के साथ पुण्यकाल और महापुण्य काल की शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन का विशेष महत्व है, जब सूर्य देव और विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है।
प्रयागराज में श्रद्धालुओं का सैलाब
प्रयागराज के माघ मेले में इस बार भी श्रद्धालुओं का हुजूम देखा जा रहा है। संगम पर लाखों की संख्या में भक्त पवित्र डुबकी लगा रहे हैं। इस भव्य आयोजन में शामिल होने आए लोगों के चेहरों पर आस्था की झलक साफ झलकती है। वहां की तस्वीरें और वीडियो इस अद्भुत नजारे की गवाही दे रहे हैं।
दही-चूड़ा की परंपरा
बिहार और यूपी में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की अनूठी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यह सफेद रंग की शुद्धता का प्रतीक है और सूर्य के उत्तरायण के समय शरीर में पित्त के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। यह पारंपरिक आहार इस दिन की विशेषता है और सामाजिक संगठनों में भी इसकी खास जगह है।
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