Sanwariya Seth Temple: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी सेठ मंदिर में भक्तों ने आस्था का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जुलाई महीने की गणना पूरी होने के बाद मंदिर के खजाने में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बार दानपात्र और ऑनलाइन माध्यमों से कुल 38 करोड़ 23 लाख 13 हजार 862 रुपये का चढ़ावा मंदिर को प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि में मिले चढ़ावे से करीब 25.80 प्रतिशत अधिक है।
भक्त ने मनोकामना पूरी होने पर क्या विशेष भेंट अर्पित की?
मध्यप्रदेश के देवास जिले से आए एक श्रद्धालु ने अपनी मन्नत पूरी होने पर भगवान सांवलिया सेठ को अनोखा उपहार चढ़ाया। इस भक्त ने अपने बेटे की मन्नत पूरी होने के बाद मंदिर में चांदी की 19 सिल्लियां अर्पित की हैं। इन सिल्लियों का कुल वजन 11 किलो 400 ग्राम है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 25 लाख 65 हजार रुपये आंकी गई है। मंदिर प्रशासन ने सभी कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इस चांदी को सुरक्षित खजाने में रखवा दिया है।
सांवलिया सेठ के खजाने में इस बार क्या-क्या मिला?
मंदिर के दानपात्र को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी 13 जुलाई को खोला गया था। इसकी गिनती कुल सात चरणों में पूरी हुई। अवकाश के दिनों को छोड़कर लगातार कई दिनों तक नोट गिनने वाली मशीनें चलती रहीं। इस पूरी गणना में नकद राशि के साथ भारी मात्रा में सोना और चांदी भी भगवान के चरणों में अर्पित किए गए। मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
- नकद चढ़ावा: दानपात्र से कुल 29 करोड़ 77 लाख 17 हजार 869 रुपये नकद मिले, जबकि मनी ऑर्डर और ऑनलाइन माध्यम से 8 करोड़ 45 लाख 95 हजार 993 रुपये प्राप्त हुए।
- सोने का दान: श्रद्धालुओं ने मंदिर में 1 किलो 148 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना चढ़ाया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.60 करोड़ रुपये है।
- चांदी का दान: भगवान को कुल 103 किलो 497 ग्राम चांदी अर्पित की गई, जिसका बाजार मूल्य लगभग 2.70 करोड़ रुपये है।
- कुल बढ़ोतरी: पिछले साल जुलाई में लगभग 30.39 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला था, जिसके मुकाबले इस बार भक्तों ने दान का नया इतिहास लिख दिया है।
भक्त भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर क्यों मानते हैं?
श्री सांवलिया सेठ को देश भर के व्यापारियों के बीच ‘व्यापारियों का साझेदार’ माना जाता है। बहुत से कारोबारी अपने व्यापार का एक तय हिस्सा भगवान के नाम निकालते हैं और उसे नियमित रूप से मंदिर के दानपात्र में डालते हैं। भक्तों का अटूट विश्वास है कि सांवरा सेठ को हिस्सेदार बनाने से उनके व्यापार में तरक्की होती है। यही वजह है कि देश के विभिन्न राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से लोग यहां दर्शन करने आते हैं और दिल खोलकर दान करते हैं।
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