Shekhawati University Convocation: राजस्थान के सीकर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावटी विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने युवाओं को डिग्रियों के साथ-साथ कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि रोजगार मिलने से जीवन के अन्य रास्ते भी सुगम हो जाते हैं।
दीक्षांत समारोह में कितने छात्रों को सम्मानित किया गया?
दीक्षांत समारोह में विभिन्न उपलब्धियाँ दर्ज की गईं:
- कुल 90 हजार विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियाँ प्रदान की गईं।
- 39 मेधावी छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से नवाजा गया।
- तीन विशिष्ट व्यक्तियों को मानद पीएचडी उपाधियाँ भी प्रदान की गईं।
- समारोह के बाद, तीन जानी-मानी हस्तियों को ‘शेखावाटी शिरोमणि’ सम्मान से अलंकृत किया गया।
- पांच विद्वानों को ‘शेखावाटी भूषण’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्यों प्रेरित किया?
समारोह की अध्यक्षता करते हुए, राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिग्री प्राप्त करना शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि जीवन की नई यात्रा की शुरुआत है। राज्यपाल ने यूपीएससी और आरपीएससी जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी बताया कि इन परीक्षाओं में छात्राएँ अधिक सफलता प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि युवाओं को शीघ्र नौकरी मिल जाती है, तो उनके लिए शादी हेतु जीवनसाथी मिलना भी आसान हो सकता है।
राज्यपाल ने कौशल विकास को इतना महत्वपूर्ण क्यों बताया?
राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री के आधार पर रोजगार प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण है। इसलिए, प्रत्येक युवा के पास व्यावहारिक कौशल होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने राजस्थान को कला और कौशल की एक समृद्ध भूमि बताया। रणकपुर स्थित भगवान महावीर मंदिर का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि इसकी भव्य नक्काशी और निर्माण में 64 वर्ष लगे, जो इस क्षेत्र की शिल्पकला की असाधारण उत्कृष्टता को दर्शाता है। राज्यपाल ने युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर व्यक्ति न केवल स्वयं प्रगति करता है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ भी पूरी करता है।
राज्यपाल ने भारत के इतिहास पर क्या टिप्पणी की?
राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने कहा कि हमें मुगलों का इतिहास पढ़ाया गया, जिसमें औरंगजेब और अकबर को शक्तिशाली तथा बुद्धिमान बताया गया। परंतु, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे प्रेरणादायी शासकों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जिनसे हमारा हौसला बढ़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हमारी शिक्षा प्रणाली को बदल दिया और तक्षशिला एवं नालंदा जैसे शिक्षण संस्थानों को नष्ट कर दिया। राज्यपाल ने यह भी कहा कि मुगलों ने लोगों का धर्मांतरण किया, उन्हें मारा और काटा भी, और भारत ने ये संकट भी सहन किए।
विश्वविद्यालय में किन नए स्थलों का लोकार्पण किया गया?
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थित ‘प्रेरणा स्थल’ और ‘शौर्य की दीवार’ का उद्घाटन किया। इसके पश्चात उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध केंद्र का लोकार्पण किया। उन्होंने हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें स्थानीय कला और कारीगरी को प्रदर्शित किया गया था। इस कार्यक्रम में कुलसचिव श्वेता यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सहायक कुलसचिव (परीक्षा) डॉ. आरसी मीना, सहायक कुलसचिव (संपदा) कन्हैया लाल जांगिड़ और आईटी निदेशक पंकज मील सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रेनू महलावत और डॉ. नीतू सिंह ने किया।




