Basant Panchami 2025: बसंत पंचमी पर कैसे करें मां सरस्वती की पूजा, क्या है शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व?

बसंत पंचमी: माँ सरस्वती का आशीर्वाद पाने का महापर्व, जानिए पूजा विधि, महत्व, और मंत्र

Bharti Sharma
Written by:
Bharti Sharma - Sub Editor
4 Min Read

Basant Panchami 2025: बसंत पंचमी का पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन माता सरस्वती को समर्पित है, जिन्हें विद्या, संगीत, और कला की देवी माना जाता है। आइए जानते हैं इस वर्ष बसंत पंचमी की तिथि, पूजा विधि, और महत्व से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी।

- Advertisement -

बसंत पंचमी 2025 की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 2 फरवरी 2025 को सुबह 9:14 बजे होगा और इसका समापन 3 फरवरी 2025 को सुबह 6:52 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, बसंत पंचमी 2 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी।

बसंत पंचमी 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष पूजा का शुभ समय 2 फरवरी 2025 को सुबह 7:09 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा।

- Advertisement -

शुभ योग:-
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद
योग: शिव योग और सिद्ध योग
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:56 तक
अमृतकाल: रात 8:24 से 9:53 तक

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी को मां सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा से ज्ञान, बुद्धि, और कला कौशल में वृद्धि होती है। खासकर विद्यार्थियों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

- Advertisement -

सरस्वती पूजा सामग्री

1. मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति
2. गणेश जी की मूर्ति
3. पीला वस्त्र
4. रोली, केसर, और हल्दी
5. पीले फूल और माला
6. पान का पत्ता, सुपारी, और आम के पत्ते
7. धूप, दीपक, और कपूर
8. भोग के लिए मालपुआ, खीर, बेसन के लड्डू
9. गंगाजल, चंदन, अक्षत, और दूर्वा

सरस्वती पूजा विधि

1. पूजा स्थान पर एक साफ चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं।
2. मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करें।
3. देवी को पीले वस्त्र, फूल, और चंदन अर्पित करें।
4. भोग में मिठाई चढ़ाएं और दीप जलाएं।
5. मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें।
6. आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।

- Advertisement -

सरस्वती मंत्र

“या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वरदण्ड मण्डितकरा, या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥”
सरस्वती आरती:-
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण, वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता ।।जय..।।
चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मंगलकारी।
सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी।। जय.।।
बायें कर में वीणा, दूजे कर माला।
शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला ।।जय..।।
देव शरण में आये, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया।।जय..।।
वेद-ज्ञान-प्रदायिनी, बुद्धि-प्रकाश करो।।
मोहज्ञान तिमिर का सत्वर नाश करो।।जय..।।
धूप-दीप-फल-मेवा-पूजा स्वीकार करो।
ज्ञान-चक्षु दे माता, सब गुण-ज्ञान भरो।।जय..।।
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी, सुखकारी ज्ञान-भक्ति पावे।।जय..।।

बसंत पंचमी पर विशेष परंपराएं

1. इस दिन विद्यार्थी अपने पढ़ाई के क्षेत्र में उन्नति के लिए माता सरस्वती की पूजा करते हैं।
2. पीले वस्त्र पहनना और पीले रंग के भोजन का सेवन इस दिन विशेष माना जाता है।
3. कई स्थानों पर पतंगबाजी का आयोजन किया जाता है।

- Advertisement -

यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसकी सटीकता की पुष्टि हेतु विशेषज्ञ की सलाह लें।

Want a Website like this?

Designed & Optimized by Naveen Parmuwal
Journalist | SEO | WordPress Expert

Contact Me
Share This Article
Avatar photo
Sub Editor
Follow:
भारती शर्मा पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। अपने कार्य क्षेत्र रहते हुए उन्होंने धर्म-कर्म, पंचांग, ज्योतिष, राशिफल, वास्तु शास्त्र, हस्तरेखा व समुद्र शास्त्र जैसे विषयों पर लेखन किया हैं। इसके अलावा उनको लोकल और ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव हैं। फिलहाल भारती शर्मा 89.6 एफएम सीकर में आरजे की पद संभालते हुए सीकर अपडेट शो का संचालन करती हैं और बतौर ज्योतिष शास्त्र लेखन कर रही हैं।
News in Image Share Link