Maternal Deaths: राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

Maternal Deaths in Rajasthan: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मौत के मामलों को लेकर चिकित्सा विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

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Rajasthan Desk - News
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Maternal Deaths: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मौत के मामलों को लेकर शासन पूरी तरह गंभीर हो गया है। हाल ही में बीस से अधिक प्रसूताओं की जान जाने के बाद चिकित्सा विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य फोकस मातृ मृत्यु दर पर लगाम लगाना और प्रसव के दौरान महिलाओं को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।

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प्रसूता की मौत पर ANM निलंबित

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई। कोटा में हुई एक प्रसूता की मौत के मामले में सही ढंग से जांच न करने को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाया। इस मामले में दोषी पाई गई एएनएम को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या हैं नए नियम?

गर्भवती महिलाओं की उचित देखभाल और इलाज के लिए स्वास्थ्य निदेशालय में तैनात डॉक्टरों को अब नई जिम्मेदारी दी गई है। इन डॉक्टरों को अलग-अलग ब्लॉकों का जिम्मा सौंपा गया है। ये डॉक्टर अपने आवंटित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की जांच से लेकर उनके अस्पताल पहुंचने तक की पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे। विशेष रूप से ऐसी महिलाओं पर नजर रखी जाएगी जिनकी डिलीवरी अगले पंद्रह दिनों के भीतर होनी है और जिनमें किसी प्रकार का स्वास्थ्य जोखिम अधिक है।

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स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए कदम

  • राज्य की सभी एक सौ चार जननी एम्बुलेंस में प्रसव किट रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • गंभीर हालत में किसी प्रसूता को दूसरे अस्पताल रेफर करते समय उनके साथ नर्सिंग स्टाफ या एएनएम का जाना जरूरी होगा।
  • सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों तक जरूरी दवाइयां हर समय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
  • बुखार से पीड़ित हर मरीज की जांच के लिए ब्लड स्लाइड बनाई जाएगी ताकि बीमारी का समय पर पता चल सके।
  • डेंगू या मलेरिया का मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके आसपास के पचास घरों में तुरंत सर्वे और कीटनाशक छिड़काव का अभियान चलाएगी।

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