Margshirsha Amavasya 2025: आज मार्गशीर्ष अमावस्या का विशेष दिन है, जो हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन पितरों की याद और उनकी तृप्ति के लिए समर्पित होता है। इसे मृगशिरा और अगहन अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष अमावस्या का शुभारंभ 19 नवंबर को सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर हुआ, और इसका समापन आज 20 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर होगा।
मार्गशीर्ष अमावस्या पर पूजा का विशेष मुहूर्त
आज मार्गशीर्ष अमावस्या के शुभ मुहूर्तों का निर्माण हो रहा है। प्रातःकालीन संध्या का मुहूर्त सुबह 5:28 से 6:48 तक है। अभिजीत मुहूर्त 11:45 से 12:28 तक रहेगा, वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 1:53 से 2:35 तक है। गोधूलि मुहूर्त शाम 5:26 से 5:52 तक और संध्या मुहूर्त शाम 5:26 से 6:46 तक रहेगा।
पितरों की प्रसन्नता के लिए विशेष उपाय
इस अमावस्या पर पितरों का तर्पण करना अत्यंत फलदायी होता है। इस दिन योग्य ब्राह्मण को भोजन कराना और व्रत रखना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान भी किया जा सकता है। पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
अमावस्या पर व्रत व दान का महत्व
मार्गशीर्ष अमावस्या पर व्रत रखने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन पूजा, जप, ध्यान और दान का महत्व अधिक होता है। पितरों के लिए किए गए अनुष्ठानों में निर्धनों को भोजन कराना और वस्त्र दान करना शामिल है, जो अत्यंत शुभ होता है।




