Jaipur Earthquake Risk: जयपुर को भूकंप के लिहाज से हाई रिस्क जोन में शामिल कर दिया गया है। यहां के अलावा अलवर और भिवाड़ी को भी इस श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि इन इलाकों में 5 से 6 रिक्टर स्केल के भूकंप आ सकते हैं, जिससे सैकड़ों पुरानी इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है।
हाल ही में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्स ने देश का नया भूकंप जोखिम नक्शा जारी किया है, जिसमें जयपुर, भिवाड़ी और अलवर को जोन 4 के अंतर्गत रखा गया है। पहले जयपुर को माइल्ड डैमेज रिस्क जोन 2 में गिना जाता था। अब आइए जानते हैं कि हाई रिस्क जोन में आने का क्या मतलब है और इससे जुड़े जोखिम क्या हो सकते हैं।
राजस्थान के कई शहरों का जोन अपग्रेड
इस नए नक्शे के आने के बाद कई शहरों के जोन को अपग्रेड किया गया है। पहले जो शहर कम जोखिम में माने जाते थे, अब उनकी गिनती संवेदनशील क्षेत्रों में होने लगी है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्स ने इस नक्शे को प्रोबैबिलिस्टिक सीस्मिक हैज़र्ड असेसमेंट मॉडल के आधार पर तैयार किया है। 2016 तक बीकानेर जोन 3 में और अजमेर, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जोन 2 में थे।
एक्सपर्ट की चेतावनी: नई इमारतों की सुरक्षा पर ध्यान दें
स्ट्रक्चरल इंजीनियर सुनील गोयल ने कहा कि पुरानी इमारतों को भूकंप के झटकों को सहन करने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। अब नई प्लानिंग और स्ट्रक्चरल सिस्टम पर ध्यान देना होगा। फिलहाल सिर्फ एक सर्टिफिकेट से इमारतों की सुरक्षा का आकलन किया जाता है, लेकिन जेडीए और अन्य एजेंसियों को सभी प्रोजेक्ट की ड्राइंग और डिजाइन की जांच करनी चाहिए।
नए नक्शे का मतलब खतरा बढ़ना नहीं है
भूवैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज पंडित के अनुसार, नए नक्शे का अर्थ यह नहीं है कि अचानक खतरा बढ़ गया है या भूकंप आने की आशंका बढ़ गई है। इसका मकसद यह जानना है कि किस क्षेत्र में कितने भूकंप आ सकते हैं। इसके जरिए हम भूकंप के प्रभाव को कितना कम कर सकते हैं। प्रोफेसर एचएस शर्मा ने कहा कि जयपुर अब दिल्ली एनसीआर के साथ जोन 4 में शामिल है, जहां भूकंप की इंटेंसिटी अधिक होती है।
नए भूकंप नक्शे से मिलेगी राहत की सांस?
नया नक्शा IS 1893 (Part 1): 2025 कोड के तहत जारी किया गया है, जो जनवरी 2025 से प्रभावी है। अब देश में सभी बड़े निर्माण इस नए कोड के हिसाब से किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों के तहत बनने वाली नई इमारतें भूकंप के झटकों को सहन कर सकेंगी, जिससे 80-90% नुकसान कम होगा। पुराने ढांचों को भी अपडेट करना जरूरी है।
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