Aravalli Controversy:अरावली की परिभाषा पर सियासी घमासान, ‘100 मीटर’ मुद्दे पर भाजपा–गहलोत आमने-सामने

Aravalli Controversy: राजस्थान की अरावली पहाड़ियां इन दिनों राजनीतिक केंद्र बनी हुई हैं। अशोक गहलोत और भाजपा के बीच 'सेव अरावली' अभियान पर आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। गहलोत ने रोजगार बढ़ाने के लिए '100 मीटर' परिभाषा का प्रस्ताव रखा था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

Naveen Parmuwal
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Naveen Parmuwal - Senior Sub Editor
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Aravalli Controversy: राजस्थान की अरावली पहाड़ियां इन दिनों राजनीतिक भूचाल का केंद्र बनी हुई हैं। यहां अरावली की परिभाषा को लेकर जबर्दस्त राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। भाजपा का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जो ‘सेव अरावली’ अभियान चला रहे हैं, उन्होंने ही अपने कार्यकाल में ‘100 मीटर’ की परिभाषा की सिफारिश की थी। गहलोत ने इस मुद्दे पर क्या सफाई दी है?

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‘सेव अरावली’ पर सियासी संग्राम

अशोक गहलोत ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार ने रोजगार बढ़ाने के मकसद से ‘100 मीटर’ की परिभाषा का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने अदालत के निर्णय का सम्मान करते हुए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) से मैपिंग करवाई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी?

सवाल उठता है कि जिस परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल पहले 2010 में खारिज कर दिया था, उसी को लेकर 2024 में वर्तमान भाजपा सरकार ने केंद्र की समिति को सिफारिश क्यों की। क्या इसे लेकर कोई दबाव था?

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गहलोत के आरोपों पर भाजपा का जवाब

भाजपा ने गहलोत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में ही अरावली की परिभाषा का मुद्दा खड़ा हुआ था। भाजपा का दावा है कि मौजूदा सिफारिशों में कोई राजनीति नहीं है।

क्या है इसके पीछे की मंशा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद के पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है। वहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मुद्दे से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है। पुलिस सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि जांच अभी जारी है।

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नवीन पारमुवाल एक युवा डिजिटल पत्रकार और अनुभवी कंटेंट विशेषज्ञ हैं। राजस्थान के सीकर से ताल्लुक रखने वाले नवीन ने पिछले 6 सालों में डिजिटल मीडिया और न्यूज इंडस्ट्री में काम किया है। उन्होंने राजस्थान के नंबर वन अखबार राजस्थान पत्रिका से अपने करियर की शुरुआत की। जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग के जरिए उन्होंने लोकल मुद्दों, घटनाओं और समाज से जुड़ी खबरों को नजदीक से देखा और पाठकों तक पहुंचाया।बाद में पत्रिका.कॉम के साथ डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए नवीन ने प्रदेश, राजनीति, व्यापार, तकनीक, मनोरंजन और अंतरराष्ट्रीय खबरों जैसे अहम मोर्चों को संभाला। उन्होंने ईटीवी भारत और वनइंडिया हिंदी जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए न्यूज एडिटिंग, कंटेंट मैनेजमेंट और होमपेज ऑपरेशंस में अपनी गहरी पकड़ बनाई।तेज और सटीक रिपोर्टिंग के साथ-साथ SEO ऑप्टिमाइजशन और ऑडियंस एंगेजमेंट में उनकी दक्षता ने उन्हें डिजिटल मीडिया में अलग पहचान दिलाई।पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें पंडित झाबरमल शर्मा पत्रकारिता पुरस्कार (डिजिटल) और गोल्डन अवॉर्ड- पत्रिका.कॉम प्रमुख हैं।
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