Aravalli News: अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पुराने आदेश पर रोक, नई समिति बनेगी

Aravalli Hills Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और खनन प्रतिबंध पर अपना नवंबर आदेश रोक दिया, नई विशेषज्ञ समिति गठित की; केंद्र और चार राज्यों को नोटिस; अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को। पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम।

Naveen Parmuwal
Written by:
Naveen Parmuwal - Senior Sub Editor
3 Min Read

Aravalli Latest Update: सुप्रीम कोर्ट ने आज अरावली पहाड़ियों के संरक्षण से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाया। कोर्ट ने 20 नवंबर के अपने पुराने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही, केंद्र सरकार और चार राज्यों को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। यह फैसला पर्यावरण बचाने के लिए एक राहत की बात माना जा रहा है।

- Advertisement -

क्या है अरावली का मामला?

अरावली भारत की सबसे पुरानी पहाड़ी श्रृंखला है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से गुजरती है। यह लगभग 670 किलोमीटर लंबी है और थार रेगिस्तान को फैलने से रोकती है। यहां की हवा साफ रखने, पानी बचाने और जंगलों की रक्षा करने में बड़ी भूमिका है। लेकिन खनन (पत्थर तोड़ने का काम) और निर्माण से यह खतरे में है।

20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा तय की थी। इसमें कहा गया था कि 100 मीटर ऊंची पहाड़ी को अरावली हिल और 500 मीटर के दायरे में दो या ज्यादा ऐसी पहाड़ियां रेंज होंगी। कोर्ट ने नई खनन अनुमति पर रोक भी लगाई थी, लेकिन पर्यावरण वाले लोगों ने कहा कि इससे ज्यादा खनन हो सकता है। इसी विवाद के बीच कोर्ट ने खुद ही मामला उठाया।

- Advertisement -

आज कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने पुराने फैसले को रोक दिया। कहा कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बिना कुछ नहीं चलेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि अरावली को बचाना सबसे जरूरी है, क्योंकि यह रेगिस्तान को रोकने वाली एकमात्र दीवार है।

कोर्ट ने कुछ लोगों की शिकायतों पर नाराजगी भी जताई, जो मामले को उलझा रहे थे। अब नई हाई लेवल कमिटी बनेगी, जिसमें जानकार लोग होंगे। यह कमिटी अरावली का पूरा अध्ययन करेगी और रिपोर्ट देगी।

- Advertisement -

क्या रुका और क्या नया?

  • पुराना फैसला रुका: 20 नवंबर का आदेश अब लागू नहीं होगा, जब तक नई रिपोर्ट न आए।
  • नई कमिटी: यह अरावली की पुरानी और नई तस्वीरों से जांच करेगी। संरक्षण की योजनाएं भी देखेगी।
  • नोटिस: केंद्र, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को जवाब मांगा गया। राज्यों को बताना होगा कि अरावली में खनन या निर्माण क्या हो रहा है।

अगला कदम कब?

अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी। तब कमिटी की रिपोर्ट और दलीलें सुनी जाएंगी।

असर क्या पड़ेगा?

यह फैसला अरावली को बचाने में मददगार है। दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग की समस्या के बीच यह जरूरी है। पर्यावरण वाले खुश हैं, लेकिन खनन वाले परेशान। विशेषज्ञ कहते हैं कि मजबूत कमिटी से बेहतर संरक्षण होगा।

- Advertisement -

Want a Website like this?

Designed & Optimized by Naveen Parmuwal
Journalist | SEO | WordPress Expert

Contact Me
Share This Article
Avatar photo
Senior Sub Editor
Follow:
नवीन पारमुवाल एक युवा डिजिटल पत्रकार और अनुभवी कंटेंट विशेषज्ञ हैं। राजस्थान के सीकर से ताल्लुक रखने वाले नवीन ने पिछले 6 सालों में डिजिटल मीडिया और न्यूज इंडस्ट्री में काम किया है। उन्होंने राजस्थान के नंबर वन अखबार राजस्थान पत्रिका से अपने करियर की शुरुआत की। जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग के जरिए उन्होंने लोकल मुद्दों, घटनाओं और समाज से जुड़ी खबरों को नजदीक से देखा और पाठकों तक पहुंचाया।बाद में पत्रिका.कॉम के साथ डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए नवीन ने प्रदेश, राजनीति, व्यापार, तकनीक, मनोरंजन और अंतरराष्ट्रीय खबरों जैसे अहम मोर्चों को संभाला। उन्होंने ईटीवी भारत और वनइंडिया हिंदी जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए न्यूज एडिटिंग, कंटेंट मैनेजमेंट और होमपेज ऑपरेशंस में अपनी गहरी पकड़ बनाई।तेज और सटीक रिपोर्टिंग के साथ-साथ SEO ऑप्टिमाइजशन और ऑडियंस एंगेजमेंट में उनकी दक्षता ने उन्हें डिजिटल मीडिया में अलग पहचान दिलाई।पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें पंडित झाबरमल शर्मा पत्रकारिता पुरस्कार (डिजिटल) और गोल्डन अवॉर्ड- पत्रिका.कॉम प्रमुख हैं।
News in Image Share Link