World Hindi Day: आज हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। हिंदी को बढ़ावा देने और भारतीय भाषाओं के विकास के लिए पहले त्रि-भाषा सूत्र की सिफारिश की गई थी। राधाकृष्णन आयोग ने कहा था कि माध्यमिक स्तर पर छात्रों को हिंदी, अपनी क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी पढ़ाई जानी चाहिए।
बाद में 1968 में कोठारी आयोग ने भी इस व्यवस्था को लागू करने की बात कही, लेकिन यह आज तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई। भाषा को लेकर देश में लंबे समय से विवाद भी होते रहे हैं।
शिक्षाविद अनिल सदगोपाल का कहना है कि सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार कम हो रही है, जिस वजह से त्रि-भाषा सूत्र को लागू करना मुश्किल हो गया है। वहीं, निजी स्कूलों में हिंदी को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है और अंग्रेजी को ज्यादा महत्व दिया जाता है। इसका असर यह हो रहा है कि हिंदी समेत दूसरी भारतीय भाषाएं धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही हैं और उनका अस्तित्व खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।
हिंदी की लोकप्रियता पर सवाल
देश में प्राइवेट स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन हिंदी शिक्षा को उतनी अहमियत नहीं दी जा रही। अनिल सदगोपाल का कहना है कि इन स्कूलों में हिंदी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। वे बताते हैं कि निजी स्कूलों में बच्चों को अंग्रेजी में बोलने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे हिंदी भाषा और अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ धीरे-धीरे दम तोड़ रही हैं।
सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक
भारत में 2014 से 2023 तक 89,441 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूलों की संख्या में 14.9% की वृद्धि हुई है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है, जहाँ क्रमशः 29,410 और 25,126 स्कूल बंद हो चुके हैं। लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इन राज्यों में निजी स्कूलों में दाखिले में भी वृद्धि हुई है।
चार भाषा सूत्र की वकालत
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर अन्विता अब्बी का मानना है कि बच्चों को चार भाषा सूत्र के आधार पर शिक्षा दी जानी चाहिए। वे कहती हैं कि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा के बाद हिंदी और अंग्रेजी को क्रमवार सिखाया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि बच्चों को अपनी मातृभाषा में मजबूत नींव दी जानी चाहिए ताकि वे जीवन भर उसे न भूलें।
हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता
हिंदी की स्वीकार्यता और लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है। प्रोफेसर अब्बी बताती हैं कि हिंदी टेलीविजन और फिल्मों ने हिंदी को दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय बना दिया है। पूर्वोत्तर राज्यों के लोग अब हिंदी की मदद से आपस में संवाद कर पा रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने हिंदी को पूरे भारत के स्कूलों में शिक्षा के रूप में अपनाने की अपील की है।
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