Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी से जुड़े प्रकरण में अब एक नई विशेष जांच टीम (SIT) मामले की तह तक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि मामले की साफ-सुथरी जांच के लिए नई टीम बना दी गई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अदालत के पिछले आदेशों का पालन करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को इस जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कौन संभालेगा नई SIT की कमान?
प्रशासन की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस इस पूरी जांच टीम का नेतृत्व करेंगे। शीर्ष अदालत ने इस मामले में पहले जो सुझाव दिए थे, उसे ध्यान में रखते हुए टीम में अनुभवी अधिकारियों को जगह मिली है। इस तीन सदस्यीय टीम का ढांचा कुछ इस प्रकार है:
- लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस को टीम का मुखिया नियुक्त किया गया है।
- अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा को टीम के सदस्य के रूप में चुना गया है।
- अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर भी इस महत्वपूर्ण जांच टीम का हिस्सा होंगे।
जांच में चार्टर्ड अकाउंटेंट की जरूरत क्यों पड़ी?
सुनवाई के वक्त सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुझाव दिया कि चूंकि मामला चंदे की रुपयों से जुड़ी हेराफेरी का है, इसलिए टीम में किसी एक्सपर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी शामिल किया जाना चाहिए। वित्तीय मामलों की बारीकी से परख करने के लिए अदालत का यह प्रस्ताव राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही एक सीए को टीम से जोड़ा जाएगा ताकि जांच की गुणवत्ता और निष्पक्षता बनी रहे।
क्या चंदे की रसीदों को सार्वजनिक किया जाएगा?
अदालत में याचिकाकर्ता के वकील ने मांग की कि मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले चंदे की रसीदों को क्षेत्र के हिसाब से वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। हालांकि, सरकार की ओर से इस मांग का कड़ा विरोध हुआ। सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि इस संवेदनशील मामले में इस तरह के कदम से अनावश्यक सनसनी फैल सकती है, जिससे बचने की जरूरत है। फिलहाल कोर्ट का मुख्य उद्देश्य जांच को तेज और पारदर्शी बनाना है।
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