Ambani Ganesh Chaturthi Celebration: एंटीलिया में दिखा भारत का असली हुनर, अंबानी के गणपति उत्सव में देशभर की कलाओं का संगम

Ambani Ganesh Chaturthi Celebration: अंबानी परिवार के घर एंटीलिया में गणपति उत्सव के दौरान देशभर की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Ambani Ganesh Chaturthi Celebration: बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग से लेकर राजस्थान की शाही पिछवाई कला तक, इस बार मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया में विराजे ‘एंटीलिया चा राजा’ का दरबार पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का आईना बना नजर आया। 14 सितंबर को आयोजित इस भव्य समारोह में सिर्फ फिल्मी सितारों का जमावड़ा ही आकर्षण का केंद्र नहीं था, बल्कि पूरे घर को देश के कोने-कोने की पारंपरिक हस्तशिल्प और कलाकृतियों से एक दुल्हन की तरह सजाया गया था। इस सजावट की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इसमें भारतीय कारीगरों के सदियों पुराने हुनर को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया गया, जिसमें मिट्टी के रंगों, सुनहरे मेहराबों और नक्काशीदार खंभों ने मिलकर एक दिव्य मंदिर जैसा माहौल तैयार कर दिया था।

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क्या थी इस शाही सजावट के पीछे की अनोखी कारीगरी?

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की मशहूर धातु कला ने जहां आयोजन की चमक बढ़ाई, वहीं बनारस के पारंपरिक हथकरघे से तैयार टेक्सटाइल ने पंडाल को एक राजसी टच दिया। राजस्थान की बारीक पिछवाई पेंटिंग, जिसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है, उसने गणपति उत्सव के धार्मिक महत्व को और भी गहरा कर दिया। गुजरात की रंग-बिरंगी बांधनी कला ने पूरे सेटअप में उत्सव के चटख रंग भर दिए, जिससे एंटीलिया का कोना-कोना खिल उठा। महाराष्ट्र की बंजारा कढ़ाई, जिसमें शीशों और रंगीन धागों का काम होता है, उसने स्थानीय संस्कृति की महक बिखेरी तो वहीं मध्य प्रदेश के झाबुआ से आए मोतियों के काम यानी बीडवर्क ने सजावट में बारीकी का तड़का लगाया।

दक्षिण भारत और लोक कलाओं का कैसा रहा संगम?

दक्षिण भारत की कलाओं को भी इस उत्सव में पूरा सम्मान दिया गया, जहां तेलंगाना के डबल इकत और आंध्र प्रदेश की कलमकारी ने कपड़ों पर अपनी कलाकारी का जादू बिखेरा। एटिकोप्पका के पारंपरिक खिलौने और कर्नाटक के मशहूर चन्नापटना के लकड़ी के खिलौनों ने सजावट में एक मासूमियत और लोक संस्कृति का पुट जोड़ दिया। बिहार की मधुबनी पेंटिंग की बारीक रेखाओं ने दीवारों को जीवंत बना दिया, जिससे यह साफ संदेश गया कि अंबानी परिवार के इस उत्सव का मकसद आधुनिकता के साथ-साथ भारत की प्राचीन जड़ों को भी दुनिया के सामने पेश करना था। पारंपरिक मंदिरों की वास्तुकला से प्रेरित यह पूरा माहौल भारतीय संस्कृति के प्रति एक सम्मान की तरह दिखाई दिया।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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