Unforgettable Fathers in Cinema: पीकू से लेकर जिंदगी वंस मोर तक, पर्दे के इन 5 पिताओं ने जीता फैंस का दिल

Unforgettable Fathers in Cinema: बॉलीवुड और गुजराती फिल्मों के उन 5 पिताओं की कहानी जो आपको कभी हंसाएंगे तो कभी इमोशनल कर देंगे।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
3 Min Read

Unforgettable Fathers in Cinema: पर्दे पर जब एक पिता अपनी भावनाओं को छुपाकर बच्चों के सपनों के लिए लड़ता है, तो दर्शक खुद को उस कहानी से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। हाल ही में साल 2026 की गुजराती फिल्म जिंदगी वंस मोर ने इस रिश्ते को एक बिल्कुल नई रोशनी में पेश किया है। सिद्धार्थ रांदेरिया ने इस फिल्म में एक ऐसे पिता का किरदार निभाया है जिसके अपने सपने और एक अलग व्यक्तित्व है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि माता पिता सिर्फ अपनी भूमिकाओं तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनकी भी एक निजी जिंदगी और इच्छाएं होती हैं। कहानी का सबसे खूबसूरत मोड़ तब आता है जब एक बेटा अपने पिता को महज एक गार्जियन के बजाय एक इंसान के तौर पर समझना शुरू करता है।

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क्या पिता का दखल भी प्यार का हिस्सा है?

अक्सर पिताओं को बहुत गंभीर दिखाया जाता है, लेकिन अमिताभ बच्चन ने फिल्म पीकू में भास्कोर बनर्जी बनकर इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। वह एक ऐसे पिता थे जो अपनी बेटी पीकू यानी दीपिका पादुकोण की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल देते थे और अपनी जिद पर अड़े रहते थे। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक पिता और बेटी के बीच चिढ़ और बेपनाह प्यार एक साथ रह सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ फिल्म 102 नॉट आउट में एक अनोखा विरोधाभास देखने को मिला। यहां 102 साल के पिता अमिताभ बच्चन अपने 75 साल के बेटे ऋषि कपूर को जिंदगी जीने का सलीका सिखाते हैं। यह फिल्म एक बड़ा संदेश देती है कि उम्र महज एक आंकड़ा है और उत्साह के साथ किसी भी मोड़ पर नई शुरुआत की जा सकती है।

सपनों की उड़ान और पिता का संघर्ष कैसा होता है?

अपनी सीमाओं से बाहर जाकर बच्चों की खुशी चाहना ही एक पिता की सबसे बड़ी पहचान है। अंग्रेजी मीडियम में इरफान खान ने चंपक बंसल के रूप में एक ऐसे ही पिता की भूमिका निभाई, जो अपनी बेटी राधिका मदान को विदेश में पढ़ाने के लिए जमीन आसमान एक कर देता है। बिना किसी भारी भरकम संवाद के इरफान ने एक साधारण पिता की बेबसी और उसके अटूट प्यार को पर्दे पर जीवंत कर दिया। हालांकि हर पिता का तरीका कोमल नहीं होता। उड़ान फिल्म में रोनित रॉय का किरदार भैरव सिंह एक सख्त और अनुशासन प्रिय पिता का है। वह अपने बेटे रोहन के लेखक बनने के सपने के खिलाफ हैं। पिता की उम्मीदों और बेटे की आजादी के बीच का यह टकराव दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या बच्चों के लिए वही रास्ता सही है जो उनके माता पिता ने चुना है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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