Asian Games 2026 Neeru Dhanda: कबड्डी छोड़ निशानेबाजी में कदम रखने वाली नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास

Asian Games 2026 Neeru Dhanda: निशानेबाज नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में नया एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Asian Games 2026 Neeru Dhanda: एक समय कबड्डी के मैदान पर अपनी फुर्ती दिखाने वाली हरियाणा की बेटी आज दुनिया भर में सटीक निशानेबाजी के लिए जानी जा रही है। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने वह कर दिखाया है जो आज तक कोई भारतीय महिला नहीं कर पाई थी। उन्होंने महिला ट्रैप शूटिंग की व्यक्तिगत स्पर्धा में 28 अंक हासिल कर न केवल गोल्ड मेडल अपने नाम किया, बल्कि 24 अंक के पुराने एशियाई रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा दिया है। नीरू एशियन गेम्स में इस कैटेगरी में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं। खास बात यह है कि इसी प्रतियोगिता में उन्होंने टीम स्पर्धा में भी रजत पदक जीतकर भारत की झोली में दोहरी खुशी डाली है।

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कैसे शुरू हुआ कबड्डी से गोल्ड मेडल तक का सफर?

नीरू ढांडा की यह सफलता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है क्योंकि उनका शुरुआती लगाव निशानेबाजी से था ही नहीं। हरियाणा के जींद जिले के एक किसान परिवार में जन्मी नीरू पहले कबड्डी खेलती थीं। उनके जीवन में मोड़ साल 2018 में आया, जब उनके ममेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जकार्ता एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। भाई की सफलता से प्रेरित होकर नीरू ने कबड्डी छोड़ बंदूक थाम ली। शुरुआत में उन्होंने लक्ष्य की बंदूक से ही अभ्यास किया और घर की डबल बैरल बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाकर अपनी स्किल्स को निखारा। इसके बाद मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी में चयन ने उनके करियर को प्रोफेशनल दिशा दी और बाद में भारतीय सेना की आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट ने उन्हें एक चैंपियन के रूप में तराशा।

सेना में सूबेदार और शूटिंग की नई सनसनी

वर्तमान में 26 साल की नीरू ढांडा भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं। हालांकि शूटिंग एक बेहद महंगा खेल है, लेकिन उनके किसान पिता और परिवार ने उनके जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। शिवपुरी, मध्य प्रदेश में बसने के बाद नीरू ने महू में अपनी कड़ी ट्रेनिंग जारी रखी। हवा में उड़ती हुई मिट्टी की प्लेटों को पलक झपकते ही चकनाचूर कर देने वाली नीरू की एकाग्रता आज पूरी दुनिया देख रही है। 2026 की इस ऐतिहासिक जीत से पहले भी वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर चुकी हैं। साल 2025 में उन्होंने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था और जुलाई 2026 में इटली के लोनाटो में हुए आईएसएसएफ विश्व कप में भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया था।

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रिकॉर्ड्स की झड़ी और भविष्य की उम्मीदें

नीरू का साल 2026 अब तक शानदार रहा है। अलमाटी में हुए आईएसएसएफ विश्व कप में मिश्रित टीम के साथ कांस्य पदक जीतने के बाद अब एशियन गेम्स का यह स्वर्ण पदक उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है। फाइनल मुकाबले में दबाव के बीच सटीक निशाना लगाने की उनकी क्षमता ने उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। क्वालीफिकेशन राउंड में 125 में से 121 का स्कोर बनाने वाली नीरू ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो खेल बदलने से लेकर इतिहास बदलने तक का सफर तय किया जा सकता है। उनकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी कि कैसे एक कबड्डी खिलाड़ी दुनिया की नंबर वन निशानेबाज बन सकती है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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