Heaviest Gold Jhumkas: दुबई में बना 16 किलो सोने का मयूर सहस्र झुमका, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

Heaviest Gold Jhumkas: दुबई में 16.5 किलो सोने से बने मयूर सहस्र झुमकों ने बनाए दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड। जानें 55 कारीगरों की मेहनत और इसकी खूबियां।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Heaviest Gold Jhumkas:

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दुबई की चमक-धमक के बीच एक ऐसी कलाकृति सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। आम तौर पर महिलाएं कानों में कुछ ग्राम के झुमके पहनती हैं, लेकिन दुबई की ज्वेलरी कंपनी जॉयअलुक्कास ने 16.514 किलोग्राम वजन के विशालकाय सोने के झुमके बनाकर इतिहास रच दिया है। इन झुमकों को मयूर सहस्र नाम दिया गया है, जिसका अर्थ एक हजार मोर होता है। 22 कैरेट शुद्ध सोने से तैयार इन झुमकों ने अपनी भव्यता के दम पर एक नहीं बल्कि दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इन्हें दुनिया के सबसे भारी सोने के झुमके और सबसे बड़े झुमकों की जोड़ी के रूप में आधिकारिक मान्यता मिल चुकी है।

कितनी लंबी चली इसे बनाने की मेहनत?

इन अनोखे और भारी-भरकम झुमकों को तैयार करना कोई मामूली काम नहीं था। इसे हकीकत में बदलने के लिए 55 अनुभवी कारीगरों ने दिन-रात एक कर दिया। इस पूरी मास्टरपीस को गढ़ने में कुल 5,840 घंटों का लंबा समय लगा है। कंपनी ने इस नायाब कलाकारी को 24 अक्टूबर 2026 को दुबई में दुनिया के सामने पेश किया। इससे पहले 12 अक्टूबर को ही भारी झुमकों की श्रेणी में रिकॉर्ड दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इन झुमकों की सबसे बड़ी खासियत इनका पारंपरिक भारतीय डिजाइन है, जो मोर के पंखों की सुंदरता और घंटीनुमा आकार को दर्शाता है।

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क्या है इन विशाल झुमकों की लंबाई और चौड़ाई?

अगर आप इन झुमकों के आकार की कल्पना करेंगे तो हैरान रह जाएंगे। इनकी लंबाई लगभग 1.215 मीटर यानी करीब 4 फीट है, जो एक छोटे बच्चे की कद के बराबर है। वहीं इनका व्यास 68.2 सेंटीमीटर मापा गया है। इन्हें पहनने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि भारतीय आभूषण कला की बारीकियों और भव्यता को वैश्विक मंच पर दिखाने के लिए बनाया गया है। कारीगरों ने इस पर इतनी महीन नक्काशी की है कि इसे देखने वाले दंग रह जाते हैं। यह न केवल सोने की मात्रा बल्कि कला और धैर्य का भी एक बेजोड़ नमूना है।

कहां देख सकते हैं आप यह अद्भुत नजारा?

अगर आप इस विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली ज्वेलरी को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं, तो आपको दुबई के गोल्ड डिस्ट्रिक्ट जाना होगा। वहां स्थित ज्वेल ऑफ जॉय शोरूम में मयूर सहस्र को आम जनता के देखने के लिए प्रदर्शित किया गया है। खास बात यह है कि इसे देखने के लिए किसी भी तरह का प्रवेश शुल्क नहीं लिया जा रहा है। फिलहाल कंपनी ने इसे केवल अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया है और इसे आम ग्राहकों के लिए बिक्री हेतु उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह ज्वेलरी पीस भारतीय संस्कृति और आधुनिक कला का एक शानदार मेल है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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