Matrubhumi May War Rest In Peace: सलमान खान की फिल्म पर मंडराया संकट, रक्षा मंत्रालय ने एनओसी देने से किया इनकार

Matrubhumi May War Rest In Peace: सलमान खान की फिल्म 'मातृभूमि' की रिलीज रक्षा मंत्रालय की एनओसी न मिलने के कारण संकट में है, जानें पूरी वजह।

Rupali kumawat
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Rupali kumawat - Sub Editor
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Matrubhumi May War Rest In Peace: भारतीय सेना की वर्दी में सलमान खान को बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष की कहानी बयां करने वाली इस फिल्म की रिलीज पर फिलहाल तलवार लटक गई है। खबर है कि रक्षा मंत्रालय ने फिल्म को अब तक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी देने से मना कर दिया है। बिना इस मंजूरी के मेकर्स सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए नहीं जा पा रहे हैं, जिसके कारण फिल्म का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

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क्या गलवान घाटी की सच्चाई बनी बड़ी रुकावट?

इस प्रोजेक्ट की नींव ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से रखी गई थी, जिसमें सलमान खान एक जांबाज सैन्य अधिकारी के लीड रोल में नजर आने वाले हैं। फिल्म की पहली स्क्रीनिंग के बाद रक्षा मंत्रालय ने कुछ गंभीर आपत्तियां जताई थीं और कई सीन में बदलाव के सुझाव दिए थे। इन निर्देशों का पालन करते हुए निर्देशक अपूर्व लाखिया और उनकी टीम ने फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों की दोबारा शूटिंग भी की। हाल ही में अक्टूबर की शुरुआत में सलमान खान और उनकी टेक्निकल टीम ने फिल्म का संशोधित वर्जन मंत्रालय को दिखाया, लेकिन इसके बावजूद हरी झंडी नहीं मिल सकी है।

क्यों बार-बार फेल हो रही है मेकर्स की प्लानिंग?

फिल्म का नाम बदलकर अब ‘Matrubhumi May War Rest In Peace’ कर दिया गया है, लेकिन नाम बदलने से मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। वास्तविक घटनाओं और सेना से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बनी फिल्मों के लिए तथ्यों की शुद्धता सबसे जरूरी होती है। मंत्रालय की ओर से हो रही इस देरी ने मेकर्स की पूरी मार्केटिंग और रिलीज स्ट्रेटेजी को बिगाड़ कर रख दिया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि मंत्रालय ने दोबारा फिल्म को क्यों रोका है या वह आगे और किस तरह के बदलावों की उम्मीद कर रहा है।

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सेंसर बोर्ड और रिलीज डेट का क्या है गणित?

किसी भी फिल्म को थिएटर्स तक पहुंचने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से हरी झंडी मिलना अनिवार्य है, लेकिन ‘मातृभूमि’ के मामले में एनओसी ही सबसे बड़ी सीढ़ी बनी हुई है। जब तक रक्षा मंत्रालय की फाइल क्लियर नहीं होती, तब तक सेंसर बोर्ड में आवेदन दाखिल करना भी संभव नहीं है। पहले इस फिल्म की रिलीज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की तारीखों के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक फैंस को केवल इंतजार ही करना होगा।

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रुपाली कुमावत पिछले कई वर्षों से लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनको हिंदी कविताएं, कहानियां लिखने के अलावा ब्रेकिंग, लेटेस्ट व ट्रेंडिंग न्यूज स्टोरी कवर करने में रुचि हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से BADM में M.Com किया हैं एवं पंडित दीनदयाल शेखावाटी यूनिवर्सिटी से family law में LL.M किया हैं। रुपाली कुमावत के लेख Focus her life, (राजस्थान पत्रिका), सीकर पत्रिका, https://foucs24news.com, खबर लाइव पटना जैसे मीडिया संस्थानों में छप चुके हैं। फिलहाल रुपाली कुमावत 89.6 एफएम सीकर में बतौर न्यूज कंटेंट राइटर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
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